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जनवादी लेखक संघ ने चार रचनाकारों को किया याद:जनसरोकारों पर हुई चर्चा, सत्ता पर सवाल ; साहित्यकारों का पुलिस महकमे के भ्रष्टाचार और मनमाने रवैये पर तंज

जनवादी लेखक संघ, लखनऊ की ओर से प्रेस क्लब में ‘भूलने के खिलाफ स्मृति का संघर्ष’ विषय पर स्मृति सभा एवं साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम मरहूम अली बाकर जैदी, दिवंगत गिरीशचन्द्र श्रीवास्तव, स्वर्गीय अवधेश श्रीवास्तव और दिवंगत शैलेन्द्र श्रीवास्तव की स्मृति को समर्पित रहा। कार्यक्रम की शुरुआत सलमान खयाल ने अली बाकर जैदी की नज्म ‘नया हिन्दोस्तान’ और ‘एटमी जंग’ के पाठ से की। इसके बाद ज्योति नंदा ने शैलेन्द्र श्रीवास्तव की चर्चित कहानी ‘पोस्टर’ का पाठ किया। वरिष्ठ कवि-आलोचक राजेन्द्र वर्मा ने कहा कि चारों रचनाकार जनवादी विचारों के पुरअसर कलमकार थे। उनकी रचनाओं में जनचेतना के साथ सत्ता की विसंगतियों के खिलाफ आवाज मिलती है। उन्होंने कहा कि दिवंगत रचनाकारों की स्मृतियों को सम्मान देना अच्छी पहल है। पुलिस महकमे के भ्रष्टाचार और मनमाने रवैये पर तंज माया मिश्रा ने अवधेश श्रीवास्तव की कहानी ‘चेहरे’ का पाठ किया। कहानी में पुलिस महकमे के भ्रष्टाचार और मनमाने रवैये पर तंज किया गया है। वहीं कवि नूर आलम नूर ने गिरीशचन्द्र श्रीवास्तव की कहानी ‘एक वाजिब आदमी’ प्रस्तुत की। मुख्य सत्र में आलोचक विभु प्रकाश सिंह ने मिलान कुंदेरा की पुस्तक ‘द बुक ऑफ लाफ्टर एंड फॉरगेटिंग’ के कथन से बात शुरू की। उन्होंने कहा कि सत्ता के खिलाफ मनुष्य का संघर्ष भूलने के खिलाफ स्मृति का संघर्ष है। आज इतिहास और महान विभूतियों की स्मृतियों को सीमित करने के प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि मिथकों को इतिहास और इतिहास के नायकों को खलनायक के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिशें भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा हैं। दिवंगत साहित्यकारों से जुड़े यादों कों साझा किए जन संस्कृति मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष कौशल किशोर ने कहा कि स्मृतियों को बचाना बेहतर दुनिया बनाने का संघर्ष है। युवा आलोचक आशीष सिंह ने रचनाकारों के जनसरोकारों और गिरीशचन्द्र श्रीवास्तव की संपादकीय क्षमता पर चर्चा की। अध्यक्षीय संबोधन में कवि-गजलकार अनिल कुमार श्रीवास्तव ने दिवंगत साहित्यकारों से जुड़े यादों कों साझा किए।कार्यक्रम का संचालन जलेस लखनऊ की सचिव शालिनी सिंह ने किया।अध्यक्ष ज्ञान प्रकाश चौबे ने आभार जताया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय महासचिव नलिन रंजन सिंह समेत साहित्यकार और साहित्यप्रेमी मौजूद रहे।

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