कानपुर में ट्रैफिक पुलिस ने ओवरस्पीडिंग पर एक कार चालक को रोका तो उसके बाएं हाथ की कोहनी के नीचे का हिस्सा कटा मिला। इसके बावजूद वह गियर वाली कार चला रहा था। कार पर काली फिल्म भी लगी थी। जांच के दौरान चालक का ड्राइविंग लाइसेंस देखा गया तो वह एडॉप्टेड व्हीकल कैटेगरी का मिला। पुलिस का कहना है कि चालक गियर वाली कार चलाने के लिए पात्र नहीं था। पुलिस ने खतरनाक ढंग से गाड़ी चलाने और काली फिल्म के लिए चालान काटा। लाइसेंस सस्पेंड करने के लिए आरटीओ को भी लिखा है। घटना कल्याणपुर में जीटी रोड पर चेकिंग के दौरान हुई। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मामले के बाद लाइसेंस जारी करने के नियमों और आरटीओ की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। ओवरस्पीडिंग पर रोका तो सामने आई हकीकत ट्रैफिक पुलिस जीटी रोड पर कल्याणपुर में चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान एक कार तेज रफ्तार में जाती दिखी। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उसे रोक लिया। कार पर काली फिल्म भी चढ़ी थी। चालक ने बात करने के लिए खिड़की का शीशा नीचे किया तो चेकिंग कर रहे ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर (TSI) ने देखा कि उसका बायां हाथ कोहनी के नीचे से कटा हुआ है। इसके बावजूद वह गियर वाली कार चला रहा था। पूछताछ में चालक ने अपना नाम विकास यादव बताया। वह बिठूर रोड, कल्याणपुर निवासी विश्वनाथ सिंह यादव का बेटा है। पुलिसकर्मियों ने उससे पूछा कि हाथ 2001 में कट गया था तो 2022 में ड्राइविंग लाइसेंस कैसे बना? इस पर विकास ने कहा कि उसके पास ऑटोमैटिक गाड़ी भी है, इसलिए लाइसेंस बना हुआ है। उसने यह भी कहा कि गाड़ी में क्लच नहीं होता। पुलिसकर्मियों से बातचीत के दौरान उसने कहा कि अब तो बिना पैर वाले लोग भी गाड़ी चला रहे हैं। गाड़ी की आरसी और डीएल उसके नाम पर हैं। आरटीओ बोला- मानकों के अनुसार बना लाइसेंस ट्रैफिक पुलिस ने चालक का खतरनाक ढंग से गाड़ी चलाने और काली फिल्म लगाने के लिए अलग-अलग चालान किया। पुलिस का कहना है कि चालक गियर वाली कार चलाने के लिए पात्र नहीं था। मामले की जानकारी आरटीओ को देकर लाइसेंस सस्पेंड करने की कार्रवाई के लिए लिखा गया है। कानपुर आरटीओ में 2022 में आरआई रहे अजीत सिंह ने बताया कि युवक का एडॉप्टेड कैटेगरी का ड्राइविंग लाइसेंस बना है। उनके मुताबिक, गलती गियर वाली कार चलाने की है। लाइसेंस तय मानकों के अनुसार बनाया गया था, इसलिए इसमें आरटीओ की गलती नहीं है। चालान करने वाले टीएसआई संजीव पाल ने बताया कि चालक का खतरनाक ढंग से गाड़ी चलाने के आरोप में चालान किया गया है। इसकी जानकारी आरटीओ को दे दी गई है। आरटीओ चाहे तो ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड कर सकता है। एडॉप्टेड ड्राइविंग लाइसेंस क्या होता है? एडॉप्टेड व्हीकल ड्राइविंग लाइसेंस दिव्यांग लोगों को उनकी शारीरिक क्षमता और जरूरत के मुताबिक वाहन चलाने के लिए दिया जा सकता है। इसके लिए वाहन में जरूरी बदलाव या सहायक उपकरण लगाए जा सकते हैं, ताकि उसे सुरक्षित तरीके से चलाया जा सके। उदाहरण के लिए, पैरों से वाहन चलाने में परेशानी होने पर हाथ से एक्सीलरेटर और ब्रेक चलाने की व्यवस्था की जा सकती है। जरूरत के मुताबिक ऑटोमैटिक गियर या दूसरे सहायक उपकरणों वाले वाहन का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। हालांकि, केवल दिव्यांगता के आधार पर लाइसेंस नहीं मिलता। संबंधित व्यक्ति की मेडिकल फिटनेस, वाहन चलाने की क्षमता और ड्राइविंग टेस्ट में प्रदर्शन के आधार पर लाइसेंसिंग अथॉरिटी फैसला लेती है। एडॉप्टेड लाइसेंस की शर्तों के मुताबिक ही वाहन चलाया जा सकता है।
