श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या धाम का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अनादिकाल से सनातन परंपरा में विशेष माना गया है। जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी राघवाचार्य महाराज ने सावन मेले में आए श्रद्धालुओं के समक्ष अयोध्या धाम के इसी विलक्षण माहात्म्य का वर्णन किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को इसके आध्यात्मिक स्वरूप से परिचित कराया। उनके प्रवचन के दौरान अयोध्या की महिमा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। भगवान श्रीराम की दिव्य लीला भूमि है अयोध्या
जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी राघवाचार्य महाराज ने बताया कि अयोध्या कोई सामान्य नगरी नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम की दिव्य लीला भूमि है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्वायम्भुव मनु अयोध्या पुरी को वैकुण्ठ से लेकर आए थे। इसी कारण अयोध्या को भगवान की दिव्य पुरी के रूप में विशेष स्थान प्राप्त है। प्रयागराज भी अपने परिकरों सहित अयोध्या आते हैं
उन्होंने कहा कि अयोध्या की महिमा इतनी व्यापक है कि जब भगवान श्रीराम के रूप में धरती पर अवतार लेते हैं, तब सभी तीर्थों के राजा माने जाने वाले प्रयागराज भी अपने परिकरों सहित अयोध्या आते हैं और पवित्र सरयू नदी में स्नान करते हैं। यह प्रसंग अयोध्या और सरयू के आध्यात्मिक महत्व को दर्शाता है। धर्म, अध्यात्म, भक्ति और मर्यादा की भी प्रमुख भूमि रही है
महाराज जी ने कहा कि अयोध्या को समस्त भूमंडल की राजधानी रहने का गौरव भी प्राप्त रहा है। यह नगरी केवल राजसत्ता का केंद्र नहीं रही, बल्कि धर्म, अध्यात्म, भक्ति और मर्यादा की भी प्रमुख भूमि रही है। भगवान श्रीराम के जीवन और उनकी मर्यादा से जुड़ी स्मृतियां अयोध्या के कण-कण में समाई हुई हैं।
उन्होंने अयोध्या को जीवों के पापों का निवारण करने वाली दिव्य पुरी बताते हुए कहा कि यहां सरयू स्नान, भगवान श्रीराम के दर्शन और साधु-संतों के सानिध्य का विशेष धार्मिक महत्व है। श्रद्धालु अयोध्या पहुंचकर स्वयं को भगवान की शरण में समर्पित करने का भाव रखते हैं। अयोध्या की आध्यात्मिक संरचना को समझाया
जगद्गुरु राघवाचार्य महाराज ने अयोध्या की आध्यात्मिक संरचना को समझाते हुए इसे भगवान का मस्तक भी बताया।कहा कि यह भगवान विष्णु के चक्र पर टिकी हुई है। उनके इस कथन ने श्रद्धालुओं के बीच अयोध्या की महिमा को लेकर विशेष भाव पैदा कर दिया।
अयोध्या में चल रहे धार्मिक आयोजनों और सावन मेले के बीच संतों के मुख से श्रीराम जन्मभूमि की ऐसी महिमा सुनकर श्रद्धालुओं में भक्ति और आस्था का भाव और गहरा हो रहा है। अयोध्या धाम की महिमा से जुड़े ये प्रसंग सावन मेले में एक बार फिर इस नगरी की सनातन आध्यात्मिक परंपरा और श्रीराम के प्रति करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था को उजागर करते हैं।
