फांसी दिलाइए इन लोगों को….बिरेन, प्रेम, राज इन लोगों ने मेरे पति को मार दिया। मेरे पापा ने पुलिस को पैसा दे दिया। पुलिस वालों ने ही हमारे निकलने की जानकारी इन लोगों को दी है। मैं कोर्ट में बयान दे चुकी थी, फिर भी बार-बार बुला रहे थे। हम लोग मना कर रहे थे कि हमें धमकी मिली है। पुलिस वालों ने भरोसा देकर बुलाया था कि कुछ नहीं होगा। उसके बाद भी ये हो गया…। ये दर्द है लव मैरिज के डेढ़ महीने बाद अपने पति को खोने वाली पत्नी अर्चना का। 13 अगस्त (गुरुवार) को अर्चना अपने पति शिवनाथ के साथ बयान देकर लौट रही थी। रास्ते में अर्चना के मायके वालों ने गाड़ी ओवरटेक करके शिवनाथ को बेरहमी से पीटा। 14 अगस्त (शुक्रवार) को शिवनाथ की मौत हो गई। मामला हथिगवां थाना क्षेत्र का है। महमदपुरबरई गांव के रहने वाले शिवनाथ (25) और इसी गांव की अर्चना (26) का 6 महीने से अफेयर चल रहा था। दोनों के घरों की दूरी 200 मीटर है। 25 जून को दोनों घर से चले गए थे। 26 जून को दिल्ली के आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली। 29 जून को दोनों ने शालीमार बाग में कोर्ट मैरिज भी कर ली थी। अर्चना के चाचा वीरेंद्र ने 27 जून को कुंडा कोतवाली में तहरीर देकर शिवनाथ पर भतीजी को बहला-फुसलाकर भगाने का केस दर्ज कराया था। इसके बाद पुलिस ने दोनों को बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस भेजा था। 13 अगस्त को शिवनाथ और अर्चना कुंडा पहुंचे और बयान दर्ज कराया। लौटते समय सुआनारी गांव के पास शिवनाथ के साथ मारपीट की गई, जिससे उसकी मौत हो गई। हमारे पास बेटी की तरह रहेगी अर्चना- पीड़ित पत्नी से बात करने के लिए भास्कर 20 किलोमीटर दूर उसके गांव पहुंचा। अर्चना अभी अपने ससुराल में है। ससुराल वालों का कहना है, हम लोग अर्चना को अपनी बेटी की तरह रखेंगे। सभी लोग अर्चना को संभाल में लगे थे। वहीं अर्चना बार-बार अपने पति को याद कर रोने लगती है। रोते-रोते उसकी आंखे सूज गई हैं। बहुत संभलने के बाद अर्चना ने भास्कर से बात की। हम लोग बयान देने गए थे, पति को मार दिया… उसने कहा, मेरा नाम अर्चना है। पुलिस वाला बयान देने के लिए नोटिस देकर गया था कि 10 बजे थाने आना है। उस पुलिस वाले का नाम धर्मेंद्र वर्मा है। 13 अगस्त को हम दोनों बयान देने गए थे। वहां पुलिस वालों ने मुझसे बोला, “तुम्हारा तो बयान हो चुका है, तुम क्यों आई हो?” पुलिस वालों ने ही मेरे चाचा लोगों को बता दिया कि ये लोग यहां आए हुए हैं। थाने के अंदर जहां हम लोग बैठे थे, मेरे चाचा सीधे वहीं आए। पहले उन्होंने हम लोगों को देखा, फिर वापस चले गए। इसके बाद वे तीन-चार लड़कों को लेकर आए। मेरे पास आकर बोले, “अर्चना, ठीक हो?” मैंने कुछ नहीं कहा, तो वकील साहब बोले, “जवाब दो।” मैंने कहा, “हां, ठीक हूं।” फिर चाचा बोले, “अब क्या चाहती हो? घर चलोगी या यहीं रहना चाहती हो?” मैंने कहा, “मैं इन्हीं के साथ रहना चाहती हूं।” इस पर वे बोले, “ठीक है, अब खुश रहना।” इतना कहते ही उन्होंने मेरे पति के साथ वहीं हाथापाई शुरू कर दी और उन्हें मारने लगे, लेकिन वकील साहब ने बीच-बचाव कर दिया। हमारी गाड़ियों की नंबर प्लेट पर गोबर लगा दिया हम दरोगा धर्मेंद्र वर्मा के पास बयान देने गए। उन्हें बताया कि अभी चाचा आए थे, मारने की धमकी देकर गए हैं और यहां भी हाथापाई की है। यह सुनकर दरोगा हंस रहे थे। जब हमने पुलिस प्रोटेक्शन मांगी, तो उन्होंने कहा, “जाओ, कुछ नहीं होगा।” उन्होंने उधर से भी पैसे लिए थे और हम लोगों से भी पैसे लिए थे। हम लोग कार को थाने परिसर के अंदर लाकर उसमें बैठकर निकले थे, ताकि किसी को पता न चले। लेकिन जैसे ही हम यहां से निकले, दरोगा ने उन्हें खबर कर दी कि ये लोग निकल गए हैं। उन्होंने आगे और पीछे दोनों तरफ गाड़ियां लगा दीं और गाड़ियों की नंबर प्लेट पर गोबर लगा दिया था। हम लोगों को इस बारे में कुछ पता ही नहीं था। हमारी गाड़ियों का पीछा किया गया कुछ देर बाद दीदी के पास फोन आया कि हमारे पीछे गाड़ी लगी हुई है। हंसुआ नाले के पास, टोल टैक्स पर हमने सोचा कि पहले कंफर्म कर लेते हैं, फिर 100 नंबर पर फोन करेंगे। वहां पहुंचने पर जब पिकअप दिखी, तो पक्का हो गया कि वे पीछा कर रहे हैं। इसके बाद हम लोगों ने गाड़ी भगाई, तो उन्होंने और तेज गाड़ी भगाकर हमारी गाड़ी के सामने लाकर रोक दी। पीछे भी गाड़ी रोक दी थी, तो कंफर्म हो गया कि हां, वे पीछा कर रहे हैं। वो लोग हमारे ड्राइवर को गाली देने लगे और धमकाने लगे। इसके बाद ड्राइवर ने गाड़ी की चाबी दे दी और गाड़ी खोल दी। फिर हम सब लोगों को बाहर निकाल दिए। मेरे पति कार से निकल भी नहीं पाए थे, तभी उनको मारने लगे। ये लोग रॉड-हॉकी लेकर आए थे। मेरे पति को बहुत मार रहे थे। मैं अपने पति को बचाने लगी तो मुझे पकड़ लिए। मुझे खींचकर अलग कर दिए थे, मुझे बचाने नहीं दिए। मेरे पति के कातिलों को फांसी हो मारने वालों में मेरे दो चाचा (जितेंद्र, बीरेंद्र), मेरे फूफा (प्रेम), मेरे बुआ का लड़का (राज) और मेरे पापा शामिल थे। ये लोग इसलिए नाराज थे क्योंकि हमने अपनी मर्जी से जबरदस्ती शादी कर ली थी। हमने 26 जून को शादी की थी। घर से 25 जून को निकल गए थे। हमें बराबर धमकियां मिल रही थीं। अब मैं चाहती हूँ कि उन लोगों को फांसी हो। इन सबके घर पर बुलडोजर चलाया जाए।” 2 मुख्य आरोपी हुए गिरफ्तार मामले में अपर पुलिस अधीक्षक बृजनन्दन राय ने बताया, महिला अर्चना यादव ने थाना हथिगवां में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में बताया गया था कि उनके पति रघुनाथ यादव के साथ कुछ लोगों ने मारपीट की थी। मारपीट में घायल रघुनाथ यादव का इलाज चल रहा था, इसी दौरान उनकी मौत हो गई। चार लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। चारों आरोपी महिला के रिश्तेदार बताए गए हैं। घटना में शामिल दो मुख्य अभियुक्तों जितेंद्र कुमार यादव और वीरेंद्र कुमार यादव को गिरफ्तार कर लिया गया है। भाई-बहनों में सबसे छोटा था लड़का लड़के के पिता देवचंद यादव मेहनत मजदूरी करते हैं। लड़का घर पर ही रहता था। लड़का दो भाई एक बहनों में सबसे छोटा था। वहीं लड़की के पिता शैलेंद्र यादव कुंडा तहसील में दस्तावेज लेखक हैं। चाचा वीरेंद्र भी उन्हीं के साथ काम करते हैं। जबकि बाबा अमृतलाल कुंडा रजिस्टार ऑफिस में चपरासी का काम करते हैं। लड़की अर्चना ने बीए तक पढ़ाई की है। अर्चना का एक छोटा भाई राहुल है। ………………………………………………………………………………………. यह खबर भी पढ़ें- सुसाइड से पहले डॉक्टर का व्यवहार बदला, अकेले टहलते थे:गोरखपुर में सड़क किनारे गिटि्टयां तोड़ते; फेसबुक से बर्थडे पोस्ट डिलीट की गोरखपुर में डॉ. परमात्मा सिंह ने अपार्टमेंट की 8वीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। घटना 13 अगस्त सुबह करीब 9:13 बजे राजेंद्र नगर के बसंत इंक्लेव अपार्टमेंट की है। सुसाइड से पहले डॉक्टर ने फेसबुक से अपनी बर्थडे की पोस्ट भी डिलीट की थीं। घटना के बाद से अपार्टमेंट में सन्नाटा पसरा है। शुक्रवार को कई लोग पार्क में टहलने तक नहीं निकले। बच्चे भी घरों में ही रहे। अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों का कहना है कि यह एक दिन में लिया गया फैसला नहीं है। यहां पढ़ें पूरी खबर
“जिन्होंने मेरे पति को मारा, उनको फांसी हो”:पीड़ित पत्नी बोली- सब मिले हुए; लव मैरिज के बाद हुई थी हत्या

