मथुरा में ऑनलाइन साइबर ठगी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह का खुलासा हुआ है। टीम ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से 76 फर्जी सिम कार्ड, 9 फर्जी आधार कार्ड की छायाप्रति, 8 मोबाइल फोन और एक बुलेरो बरामद हुई है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों को 16 अगस्त की रात करीब 12:30 बजे मोती मंजिल के सामने चाय के खोखे के पास से पकड़ा गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राजस्थान के डीग के कांमा निवासी निसार और मथुरा के शेरगढ़ थाना क्षेत्र के विशम्भरा निवासी खालिद, इंसाफ, तालिम और तोफीक के रूप में हुई है। परिचित बनकर करते थे रुपए की मांग पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे लोगों को फोन कर उनके परिचित बनते थे। इसके बाद किसी मजबूरी का हवाला देकर रुपए मांगते थे। इस पूरी साजिश में फर्जी सिम कार्ड और व्हाट्सएप अकाउंट का इस्तेमाल किया जाता था। आरोपी ट्रूकॉलर, फोनपे, गूगलपे और पेटीएम जैसे ऐप के जरिए मोबाइल नंबर से जुड़ी जानकारी जुटाते थे। इसके बाद सोशल मीडिया और व्हाट्सएप से संबंधित व्यक्ति की फोटो हासिल कर फर्जी नंबर से व्हाट्सएप अकाउंट बनाते थे। प्रोफाइल पर भी उसी व्यक्ति की तस्वीर लगा देते थे। नकली मैसेज भेजकर भी करते थे ठगी पुलिस के अनुसार, फर्जी पहचान तैयार करने के बाद आरोपी पीड़ित के परिचितों को निशाना बनाते थे। उधार के नाम पर रकम अपने खातों में ट्रांसफर करवा लेते थे। इसके अलावा फर्जी लिंक भेजने और रुपए जमा होने का नकली मैसेज भेजकर भी लोगों को ठगी का शिकार बनाया जाता था। जांच में बरामद आधार कार्ड भी फर्जी पाए गए। आरोपियों ने अलग-अलग लोगों के नाम, पते और तस्वीरों का इस्तेमाल कर ये दस्तावेज तैयार किए थे। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और इनके जरिए की गई दूसरी साइबर ठगी की घटनाओं के बारे में जानकारी जुटा रही है। पुलिस के मुताबिक, निसार, खालिद, इंसाफ, तालिम और तोफीक के खिलाफ साइबर ठगी से जुड़े मुकदमे दर्ज हैं। खालिद पर आबकारी अधिनियम के तहत भी एक मामला दर्ज है। आरोपियों के खिलाफ थाना कोतवाली में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
मथुरा में साइबर ठगी गिरोह का खुलासा:फर्जी सिम और आधार से बनाते थे व्हाट्सएप अकाउंट, परिचित बनकर मांगते थे रुपए

