अलीगढ़ का बादल लड़की के प्यार में पाकिस्तान पहुंच गया। करीब दो साल पहले वह बिना वीजा के सीमा पार कर गया था। पाकिस्तान में अवैध तरीके से घुसने पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। कोर्ट ने उसे एक साल की सजा सुनाई। उसकी सजा पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद बादल अब भी लाहौर के डिटेंशन सेंटर में है। बादल के मां-पिता ने बताया- उसकी भारत वापसी की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। हाल ही में उसने फोन पर पिता से बात की। उसने बताया कि वह पेट, आंतों और किडनी की बीमारी से परेशान है। घरवाले अब पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और सीएम योगी से बेटे की जल्द वापसी की गुहार लगा रहे हैं। बादल की मां ने हाथ जोड़कर कहा कि दो साल से बेटे को नहीं देखा। सरकार मेरे बेटे को वापस बुला दे। बरला क्षेत्र के खिटकारी गांव का रहने वाला 23 साल का बादल दिल्ली की एक कंपनी में सिलाई करता था। तभी सोशल मीडिया पर उसकी दोस्ती पाकिस्तान की सना रानी से हुई। दोनों के बीच धीरे-धीरे प्यार हो गया। बादल ने अगस्त 2024 में पाकिस्तान जाने की कोशिश की थी, लेकिन वह सफल नहीं हुआ। इसके बाद 15 अक्टूबर 2024 को वह बिना वीजा पाकिस्तान पहुंच गया। पाकिस्तान की जेल से निकला, अब डिटेंशन सेंटर बंद बादल के पिता खेती और मजदूरी करते हैं। बादल तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर है। उसके दोनों भाई रंगाई-पुताई का काम करते हैं। उसकी इकलौती बहन की शादी हो चुकी है। बादल की अभी शादी नहीं हुई है। परिवार के मुताबिक, पाकिस्तान पहुंचने के बाद बादल काफी समय तक वहीं रहा और काम भी किया। 27 दिसंबर, 2024 को पंजाब प्रांत के मंडी बहाउद्दीन इलाके की पुलिस ने उसे पाकिस्तान में अवैध रूप से प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। जांच में उस पर जासूसी का संदेह सही नहीं पाया गया। इसके बाद विदेशी अधिनियम के तहत 13 मई को पाकिस्तान की अदालत ने बादल की दलीलें सुनीं। उसे एक साल की कैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने उस पर 5 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। बादल की एक साल की सजा 2025 के अंत या 2026 की शुरुआत में पूरी हो गई। सजा पूरी होने के बाद उसे जेल से निकालकर डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया। यहीं से उसकी भारत वापसी की प्रक्रिया शुरू होनी थी, लेकिन अब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। मां बोलीं- दो-तीन साल से बेटे की शक्ल नहीं देखी मां गायत्री देवी ने कहा- मुझे बादल के पाकिस्तान जाने की जानकारी नहीं थी। करीब दो-तीन महीने बाद मीडिया के जरिए पता चला कि बेटा पाकिस्तान की जेल में है। इसके बाद वह इधर-उधर से पैसे जुटाकर दिल्ली गईं। पांच दिन तक बेटे की जानकारी के लिए भटकती रहीं, लेकिन किसी अधिकारी या नेता से मुलाकात नहीं हो सकी। मैंने सरकार से बहुत गुहार लगाई, लेकिन अब तक मदद नहीं मिली। उन्होंने हाथ जोड़कर सरकार से अपील की है कि उनके बेटे की जल्दी सुनवाई कराकर उसे वापस लाया जाए। दो साल से उन्होंने बेटे की शक्ल नहीं देखी है। पिता बोले- बेटे ने फोन पर कहा, मैं यहां परेशान हूं पिता कृपाल सिंह ने बताया कि हाल में मेडिकल जांच के दौरान बादल से फोन पर बात हुई थी। उसने तबीयत खराब होने और पेट, आंतों, किडनी में दिक्कत की बात बताई। जेल प्रशासन और वकील के जरिए उन्हें पता चला कि बादल की सजा पूरी हो चुकी है। पाक प्रशासन ने कहा है कि भारत सरकार की तरफ से लेटर मिलने पर उसे जल्द रिहा किया जा सकता है। कृपाल सिंह के मुताबिक, बादल ने फोन पर कहा कि मम्मी-पापा सरकार से मदद की गुहार लगाएं और मुझे भारत वापस बुला लें। भाई बोले- बहुत कोशिश की, सरकार ने कोई मदद नहीं की भाई निशांत ने कहा- बादल ने कभी परिवार को पाकिस्तान जाने या वहां किसी लड़की से संपर्क के बारे में नहीं बताया। भाई की वापसी के लिए परिवार ने बहुत कोशिश की और दिल्ली भी गया, लेकिन प्रधानमंत्री या किसी मंत्री से मुलाकात नहीं हो सकी। पाकिस्तान की तरफ से बताया गया कि बादल की सजा पूरी हो चुकी है, लेकिन भारत सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिल रही। भाई से अभी बातचीत भी नहीं होती है और उसकी बहुत याद आती है। उनकी मांग है कि मोदी और योगी सरकार भाई को जल्द से जल्द भारत वापस लाए। सना के लिए बादल ने धर्म बदला, फिर भी उसने नहीं अपनाया पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों ने बादल से पूछताछ की। इस दौरान बादल ने बताया कि उसने सना से निकाह करने के लिए इस्लाम धर्म कबूल कर लिया था, लेकिन सना ने उसे अपनाने से साफ इनकार कर दिया। पिता कृपाल ने बताया- मुझे जब बेटे के जेल में बंद होने का पता चला, तो इंटरनेट के जरिए पाकिस्तान के वकील फियाज रामे से संपर्क किया। उनसे केस लड़ने की अपील की। वे तैयार हो गए। 28 फरवरी को कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान बादल ने वकील को एक कागज का टुकड़ा दिया। कहा- इसको मंडी बहाउद्दीन में सना के घर पहुंचा दीजिएगा। लेटर में क्या लिखा था पढ़िए…. ————– ये खबर भी पढ़िए- डॉक्टर के 8वीं मंजिल से कूदकर सुसाइड करने का CCTV: लिखा- मौत की जिम्मेदार ठग गरिमा; गोरखपुर में बेटी बोली- पापा लौट आओ मेरी मौत की जिम्मेदार गरिमा सिंह और उसका गिरोह है…गुरुवार सुबह यह लाइन एक कागज पर लिखकर डॉ. परमात्मा सिंह ने सुसाइड कर लिया। वह सुबह 9:10 बजे अपने फ्लैट से निकले। सुसाइड नोट को पैंट की दाएं जेब में डाला और तेजी से पहले नीचे पार्क में गए। करीब 9:13 बजे पार्क से बेसमेंट की तरफ गए, वहां से लिफ्ट से 8वीं मंजिल पर पहुंचे। यहां से कूद गए। पढ़ें पूरी खबर…
