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55 वर्षों तक 15 जनवरी को मकर संक्रांति: 72 साल में बदलती तारीख, राशि अनुसार दान और परहेज

15 january makarshakranti 2026

मकर संक्रांति को लेकर इस बार एक खास जानकारी सामने आई है। साल 2026 में मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी और खास बात यह है कि अब अगले 55 वर्षों तक यानी वर्ष 2080 तक मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही पड़ेगी। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इसके बाद सूर्य का राशि परिवर्तन 16 जनवरी को होगा।

इस दिन ग्रहों के राजा सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य का यह राशि परिवर्तन 15 जनवरी की रात 9 बजकर 38 मिनट पर होगा। इसके साथ ही खरमास की अवधि समाप्त हो जाएगी और विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो सकेगी।

इस बार मकर संक्रांति वृद्धि योग, शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि और ज्येष्ठा नक्षत्र में मनाई जाएगी। शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण काल को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को देवताओं की रात कहा गया है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि मकर संक्रांति के दिन साधारण नदी भी गंगा के समान पुण्यदायिनी मानी जाती है।

72 साल में बदलती है तारीख

ज्योतिषविदों के अनुसार सूर्य के राशि परिवर्तन में हर साल लगभग 20 मिनट का विलंब होता है। तीन वर्षों में यह अंतर करीब एक घंटे का हो जाता है और इसी तरह 72 वर्षों में यह अंतर पूरे 24 घंटे का हो जाता है। चूंकि सूर्य और चंद्रमा पीछे नहीं चलते, इसलिए तिथि में एक दिन की वृद्धि हो जाती है।

इतिहास पर नजर डालें तो वर्ष 1936 से मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जा रही थी। इससे पहले 1864 से 1936 तक 13 जनवरी और 1792 से 1864 तक 12 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाती थी। वर्ष 2008 में 72 वर्षों का चक्र पूरा हुआ, लेकिन कुछ वर्षों तक सूर्य का राशि परिवर्तन प्रातःकाल में होने के कारण संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाती रही।

इससे करें परहेज

मकर संक्रांति के दिन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
इस दिन नशे से दूर रहें, तामसिक भोजन का सेवन न करें और किसी का अपमान करने से बचें
इसके अलावा पेड़ों की कटाई न करें और तुलसी के पत्ते न तोड़ें, क्योंकि इन्हें धार्मिक रूप से वर्जित माना गया है।

राशि के अनुसार करें दान

मकर संक्रांति पर दान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि राशि के अनुसार दान करने से पुण्य फल कई गुना बढ़ जाता है।

मकर संक्रांति न केवल खगोलीय परिवर्तन का पर्व है, बल्कि यह दान, पुण्य और नए शुभ कार्यों की शुरुआत का भी प्रतीक मानी जाती है।

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