Koiripur-sultanpur में पाले का कहर: आलू और सरसों की फसल को नुकसान, किसान चिंतित

कोइरीपुर क्षेत्र में जनवरी की शीतलहर और घने कोहरे ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। लगातार गिरते तापमान और पाले के असर से रबी फसलों को नुकसान पहुंचना शुरू हो गया है। सबसे ज्यादा प्रभाव सरसों और आलू की फसल पर देखा जा रहा है, जबकि अरहर, चना, मटर और गेहूं की फसलें भी जोखिम में हैं।

स्थानीय कृषि जानकारों के अनुसार, कोइरीपुर क्षेत्र में सरसों की फसल में फूल झड़ने की समस्या सामने आ रही है। फूल झड़ने से सीधे तौर पर दाने बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे पैदावार घटने की आशंका बढ़ गई है। वहीं आलू की फसल में झुलसा रोग का खतरा बढ़ रहा है। कोहरा और ठंड के कारण खेतों में नमी बनी रहने से रोग फैलने की संभावना और अधिक हो गई है।

किसानों को सलाह दी गई है कि वे फसलों की नियमित निगरानी करें और समय पर बचाव उपाय अपनाएं। सरसों की फसल को रोग और पाले से बचाने के लिए अनुशंसित फफूंदनाशक दवाओं का छिड़काव किया जा सकता है। दवा का घोल बनाकर पूरे पौधे पर ऊपर से नीचे तक समान रूप से छिड़काव करने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।

कोइरीपुर में कोहरे और शीतलहर का असर चना, मटर और गेहूं की फसलों पर भी दिखने लगा है। पाले की स्थिति में इन फसलों की पत्तियां झुलसने लगती हैं और पौधों की बढ़वार रुक जाती है। यदि ठंड का यही दौर जारी रहा तो आने वाले दिनों में नुकसान और बढ़ सकता है।

कृषि विशेषज्ञों ने फसलों को पाले से बचाने के लिए कुछ जरूरी उपाय अपनाने की सलाह दी है। शाम के समय हल्की सिंचाई करने से खेत की मिट्टी का तापमान संतुलित रहता है, जिससे पाले का प्रभाव कम होता है। इसके अलावा रात के समय खेतों के किनारे घास-फूस जलाकर हल्का धुआं करने से भी ठंड का असर घटाया जा सकता है। किसानों को यह भी ध्यान रखने को कहा गया है कि खेतों में पानी जमा न हो, क्योंकि रुका हुआ पानी जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है।

क्षेत्र के किसानों का कहना है कि मौसम की मार से फसलों पर संकट बढ़ता जा रहा है। यदि अगले कुछ दिनों तक तापमान में सुधार नहीं हुआ, तो उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसे में समय रहते सावधानी और उचित कृषि उपाय ही फसलों को बचाने का सबसे बड़ा सहारा बन सकते हैं।

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