दिल्ली में विपक्ष की मॉक पार्लियामेंट और मुख्य चुनाव आयुक्त पर महाभियोग
नई दिल्ली में कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने एक अनूठी पहल के तहत ‘मॉक पार्लियामेंट’ (प्रतीकात्मक संसद) का आयोजन किया। यह प्रतीकात्मक संसद कुल 3 घंटे 23 मिनट तक चली, जिसकी अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की। इस विशेष सत्र में देश के 19 विपक्षी दलों के 215 सांसद शामिल हुए, जहां मुख्य रूप से चुनावी प्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए गए।
2024 लोकसभा चुनाव को बताया अवैध
मॉक पार्लियामेंट को संबोधित करते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘SIR’ के माध्यम से लगभग 13.3 करोड़ यानी 15 फीसदी मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। राहुल गांधी के मुताबिक, इनमें से कई ऐसे मतदाता थे जिन्होंने 2024 के आम चुनाव में अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। उन्होंने दावा किया कि उस चुनाव में जीत और हार का अंतर मात्र 3 प्रतिशत वोट का था, इसलिए पूरी चुनाव प्रक्रिया और उसके परिणाम पर बड़े सवाल खड़े होते हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जन-महाभियोग
सत्र के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष म मल्लिकार्जुन खड़गे मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जन-महाभियोग प्रस्ताव लेकर आए। इस प्रस्ताव में मुख्य चुनाव आयुक्त पर कुल 6 गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि यह महाभियोग सांकेतिक है, लेकिन इसमें जनता या राजनीतिक दलों द्वारा किसी उच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया जाता है। विपक्षी दलों के सभी उपस्थित सांसदों ने इस प्रस्ताव का पूर्ण समर्थन करते हुए इसे पारित किया।
राहुल गांधी के भाषण की 5 बड़ी बातें
मॉक पार्लियामेंट को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने अपने भाषण में कई अहम मुद्दों को उठाया और सरकार तथा चुनाव आयोग पर कड़े प्रहार किए:
- संस्थानों के बंद होने का आरोप: राहुल गांधी ने कहा कि यह बेहद अजीब स्थिति है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के महाभियोग जैसे गंभीर विषय पर चर्चा करने के लिए पूरे विपक्ष को संसद भवन के बजाय बगीचे में बैठना पड़ रहा है, क्योंकि उनके लिए बाकी सभी संवैधानिक संस्थान के दरवाजे बंद कर दिए गए हैं।
- CEC के इस्तीफे की मांग: उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि ज्ञानेश कुमार इस पद पर नहीं टिक पाएंगे। यदि इन खुलासे के बावजूद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) उन्हें इस पद पर बनाए रखने पर अड़ी रहती है, तो इससे सरकार की नीयत स्पष्ट हो जाएगी।
- जनता द्वारा न भुलाए जाने का दावा: राहुल गांधी ने कहा कि बीजेपी भले ही चुनावों में धांधली और हेरफेर करती रहे, लेकिन देश की जनता और विपक्ष का हर एक सदस्य इसे कभी नहीं भूलेगा और न ही माफ करेगा।
- राजनीतिक हथियार का जिक्र: उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि हालात तेजी से बदल रहे हैं और अब इस संघर्ष के बीच एक नया राजनीतिक हथियार आ गया है, जो विरोधी ताकतों को करारा नुकसान पहुंचाएगा।
- देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग: राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव का पुरजोर समर्थन किया और मांग की कि उन पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष न्याय के दायरे में लाया जाना चाहिए।
राजनीतिक सरगर्मी और आगे की रणनीति
इस प्रतीकात्मक संसद और जन-महाभियोग के जरिए विपक्ष ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी आक्रामक रणनीति को और तेज कर दिया है। हालांकि संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों को हटाने की एक निश्चित प्रक्रिया होती है और इस प्रकार के जन-महाभियोग सांकेतिक विरोध का हिस्सा माने जाते हैं, लेकिन विपक्षी दलों का यह कदम आगामी राजनीतिक गलियारों में बड़ी बहस का विषय बन गया है। इस पूरी घटना ने देश की चुनावी निष्पक्षता और संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

