भारतीय सेना में सेवा दे रहे अग्निवीरों को लेकर एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। केंद्र सरकार पहले बैच के कुछ अग्निवीरों को चार साल की सेवा पूरी होने के बाद एक्सटेंशन (कार्यकाल विस्तार) देने पर विचार कर रही है। यह उन जवानों के अतिरिक्त होगा जिन्हें स्थायी रूप से सेना में शामिल किया जाएगा। आपको बता दें कि अग्निवीर योजना के पहले बैच का चार साल का कार्यकाल आगामी 21 नवंबर को समाप्त होने जा रहा है।
दिल्ली में हो चुकी हैं कई उच्च स्तरीय बैठकें
हाल ही में सामने आई जानकारी के अनुसार, अग्निवीरों के एक्सटेंशन के प्रस्ताव को लेकर पिछले कुछ दिनों में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कई हाईलेवल बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक फैसला घोषित नहीं किया गया है। प्रस्तावित एक्सटेंशन की अवधि कितने समय की होगी, इस पर भी अभी स्थिति स्पष्ट नहीं होनी बाकी है, लेकिन माना जा रहा है कि स्थायी भर्ती प्रक्रिया के साथ ही इस पर भी जल्द मुहर लग सकती है।
अग्निपथ योजना के तहत 25% स्थायी भर्ती का प्रावधान
विदित हो कि अग्निपथ योजना की शुरुआत वर्ष 2022 में की गई थी। इस योजना के माध्यम से तीनों सेनाओं (थल सेना, नौसेना और वायुसेना) में युवाओं को चार साल की अवधि के लिए ‘अन्य रैंक’ (Other Ranks) पर भर्ती किया जाता है। योजना के नियमों के अनुसार, प्रत्येक बैच के अधिकतम 25 फीसदी अग्निवीरों को चार साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद नियमित कैडर में स्थायी रूप से सेवा जारी रखने का अवसर दिया जाता है।
चयन और नियमितीकरण की प्रक्रिया
नियमित कैडर में चयन के लिए आवेदन पत्रों पर एक केंद्रीय प्रक्रिया के तहत विचार किया जाता है। इस प्रक्रिया में निम्नलिखित मुख्य बिंदु शामिल होते हैं:
- चार साल की सेवा के दौरान अग्निवीर का समग्र प्रदर्शन।
- सशस्त्र बलों की संगठनात्मक आवश्यकताएं।
- संबंधित सेना (थल, नौसेना, वायुसेना) की निर्धारित नीतियां और मानक।
वायुसेना पहले ही ले चुकी है बड़ा फैसला
अग्निवीरों के स्थायीकरण की दिशा में पिछले महीने भारतीय वायुसेना ने एक अहम कदम उठाया था। वायुसेना ने अपने पहले ‘अग्निवीर वायु’ बैच के कुल 2,850 रिक्रूट्स में से 712 जवानों को आगे की सेवा के लिए बनाए रखने का आधिकारिक फैसला लिया था। अब सेना के अन्य अंगों और पहले बैच के पूर्ण कार्यकाल को देखते हुए सरकार द्वारा एक्सटेंशन पर विचार किया जाना एक बड़ा नीतिगत कदम माना जा रहा है। 21 नवंबर को पहले बैच का कार्यकाल पूरा होने से पहले इस पर अंतिम निर्णय आने की पूरी उम्मीद है।

