अहमदाबाद में सोमवार को अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2026 के दौरान एक खास दृश्य देखने को मिला, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने एक साथ पतंग उड़ाई। यह आयोजन अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट पर हुआ, जहाँ देश-विदेश से आए पतंग प्रेमियों की मौजूदगी ने माहौल को उत्सवमय बना दिया।
कार्यक्रम के दौरान दोनों नेताओं को भगवान हनुमान जी की तस्वीर वाली पतंग उड़ाते हुए देखा गया। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की यह भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है और इस दौरान उनका इस पारंपरिक उत्सव में शामिल होना भारत–जर्मनी संबंधों के सांस्कृतिक और कूटनीतिक पक्ष को दर्शाता है। इससे पहले दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव का उद्घाटन किया और प्रतिभागियों से बातचीत भी की।
इस दृश्य को लेकर सोशल मीडिया और सार्वजनिक विमर्श में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। एक वर्ग का मानना है कि यह भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान का प्रतीक है। समर्थकों के अनुसार, भगवान हनुमान जी शक्ति, भक्ति और निष्ठा के प्रतीक हैं और उनकी आकृति वाली पतंग उड़ाना आस्था और सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर दिखाने जैसा है। विदेशी राष्ट्राध्यक्ष की मौजूदगी में ऐसा दृश्य भारत की सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करता है।
वहीं दूसरी ओर, कुछ लोगों ने इस पर आपत्ति भी जताई। उनका कहना है कि किसी धार्मिक आराध्य की आकृति को पतंग जैसी वस्तु से जोड़ना मर्यादा से जुड़ा सवाल खड़ा करता है। आलोचकों के अनुसार, पतंग उड़ने के बाद कटती है या गिरती है, ऐसे में धार्मिक प्रतीकों के प्रयोग में अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए, खासकर तब जब मामला देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से जुड़ा हो।
पतंग महोत्सव से पहले प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज़ ने साबरमती आश्रम का भी दौरा किया, जहाँ उन्होंने महात्मा गांधी से जुड़े स्थलों को देखा। यह दौरा भारत की सांस्कृतिक और नैतिक विरासत को समझने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2026 केवल एक सांस्कृतिक उत्सव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह भारत और जर्मनी के बीच बढ़ते द्विपक्षीय संबंधों का प्रतीक भी बना। साथ ही, हनुमान जी की तस्वीर वाली पतंग को लेकर उठा विमर्श यह भी दर्शाता है कि सार्वजनिक जीवन में आस्था की अभिव्यक्ति और धार्मिक मर्यादा के बीच संतुलन बनाए रखना कितना संवेदनशील विषय है।

