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देवरिया की स्वयं सहायता समूह महिलाओं को मिलेगा बाजार, बढ़ेगी कमाई

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देवरिया जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर करीब 800 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं। ये समूह ओडीओपी योजना के तहत सजावटी सामान, झालर-झूमर, रेडीमेड गारमेंट्स समेत अन्य उत्पादों का निर्माण कर रहे हैं। इन समूहों से जुड़ी महिलाएं मेहनत से उत्पाद तो तैयार कर रही हैं, लेकिन अब तक स्थायी बाजार की कमी उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई थी।

कुछ समूहों को विकास भवन स्थित सरस इंपोरियम में आउटलेट की सुविधा दी गई है, जिससे उन्हें अपने उत्पाद बेचने का अवसर मिला है। वहीं शहर के रामगुलाम टोला निवासी प्रीति वर्मा ने गोरखपुर स्थित चिड़ियाघर परिसर में अपना आउटलेट खोल रखा है। इस आउटलेट के माध्यम से उनके समूह से जुड़ी करीब एक दर्जन महिलाओं की आजीविका चल रही है और नियमित आमदनी हो रही है।

हालांकि, जिले में अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे स्वयं सहायता समूह हैं, जिन्हें अपने उत्पादों की बिक्री के लिए बाजार नहीं मिल पा रहा है। ऐसे समूहों के लिए बजट में किए गए नए प्रावधानों को राहत के रूप में देखा जा रहा है। सरकार की योजना है कि ओडीओपी और स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को सरकारी प्लेटफॉर्म, सी-मार्ट और अन्य विपणन माध्यमों से जोड़ा जाए, ताकि महिलाओं को बिचौलियों पर निर्भर न रहना पड़े।

अधिकारियों का मानना है कि बाजार की उपलब्धता बढ़ने से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे बड़े स्तर पर उत्पादन करने के लिए आगे आएंगी। इससे न सिर्फ महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि जिले में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।

कुल मिलाकर, आम बजट में किए गए प्रावधान देवरिया की स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और स्थायी आय की दिशा में एक अहम कदम माने जा रहे हैं।

देवरिया।
केंद्रीय बजट में लखपति दीदी योजना को जारी रखने और उसे और मजबूत करने की घोषणा के बाद देवरिया जिले की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं में नई उम्मीद जगी है। बजट में महिला समूहों द्वारा एक जनपद एक उत्पाद (ODOP) योजना के तहत तैयार किए जा रहे उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिससे जिले की महिलाओं की आमदनी बढ़ने की संभावना है।

देवरिया जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर करीब 800 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं। ये समूह ओडीओपी योजना के तहत सजावटी सामान, झालर-झूमर, रेडीमेड गारमेंट्स समेत अन्य उत्पादों का निर्माण कर रहे हैं। इन समूहों से जुड़ी महिलाएं मेहनत से उत्पाद तो तैयार कर रही हैं, लेकिन अब तक स्थायी बाजार की कमी उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई थी।

कुछ समूहों को विकास भवन स्थित सरस इंपोरियम में आउटलेट की सुविधा दी गई है, जिससे उन्हें अपने उत्पाद बेचने का अवसर मिला है। वहीं शहर के रामगुलाम टोला निवासी प्रीति वर्मा ने गोरखपुर स्थित चिड़ियाघर परिसर में अपना आउटलेट खोल रखा है। इस आउटलेट के माध्यम से उनके समूह से जुड़ी करीब एक दर्जन महिलाओं की आजीविका चल रही है और नियमित आमदनी हो रही है।

हालांकि, जिले में अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे स्वयं सहायता समूह हैं, जिन्हें अपने उत्पादों की बिक्री के लिए बाजार नहीं मिल पा रहा है। ऐसे समूहों के लिए बजट में किए गए नए प्रावधानों को राहत के रूप में देखा जा रहा है। सरकार की योजना है कि ओडीओपी और स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को सरकारी प्लेटफॉर्म, सी-मार्ट और अन्य विपणन माध्यमों से जोड़ा जाए, ताकि महिलाओं को बिचौलियों पर निर्भर न रहना पड़े।

अधिकारियों का मानना है कि बाजार की उपलब्धता बढ़ने से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे बड़े स्तर पर उत्पादन करने के लिए आगे आएंगी। इससे न सिर्फ महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि जिले में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।

कुल मिलाकर, आम बजट में किए गए प्रावधान देवरिया की स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और स्थायी आय की दिशा में एक अहम कदम माने जा रहे हैं।

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