केंद्र सरकार और सरकारी तेल कंपनियों ने E20 पेट्रोल में तय सीमा से अधिक एथेनॉल होने के कर्नाटक सरकार के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लिए गए 893 नमूनों की प्रयोगशाला में जांच की गई है, और ये सभी नमूने निर्धारित 19 से 21 प्रतिशत की सीमा के भीतर पाए गए हैं।
राहुल गांधी के दावों पर छिड़ी बहस
हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट शेयर करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। राहुल गांधी ने दावा किया था कि ‘E20 अब 420 बन गया है’ और जनता की गाड़ियों से पेट्रोल की चोरी हो रही है। उनके मुताबिक, कर्नाटक सरकार द्वारा कराए गए परीक्षण में पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा 20% से काफी अधिक पाई गई है, जिससे ग्राहकों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
पेट्रोलियम मंत्रालय और तेल कंपनियों का पक्ष
पेट्रोलियम मंत्रालय ने कर्नाटक सरकार के उन दावों का खंडन किया है जिनमें पेट्रोल में 26 से 31 प्रतिशत तक एथेनॉल होने की बात कही गई थी। मंत्रालय के मुताबिक, कर्नाटक से लिए गए 56 नमूनों में एथेनॉल की औसत मात्रा 19.30% दर्ज की गई है, जो पूरी तरह सुरक्षित मानकों के दायरे में है।
इसके अलावा, देश की तीन प्रमुख तेल कंपनियों—इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने कर्नाटक सरकार की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कंपनियों का कहना है कि यह जांच निर्धारित नियमों और मानकों के तहत नहीं की गई है। तेल कंपनियों ने स्पष्ट किया कि एथेनॉल पेट्रोल से अधिक भारी होता है, जबकि कर्नाटक की जांच में नमूनों की डेंसिटी कम दर्ज की गई है, जो तकनीकी रूप से सही नहीं है।
BIS मानकों के अनुरूप है ईंधन
तेल कंपनियों ने दोहराया है कि कर्नाटक सहित देशभर में आपूर्ति किया जाने वाला E20 पेट्रोल भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के तय मानक IS 17021 के बिल्कुल अनुरूप है। यह मानक विशेष रूप से एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के लिए ही निर्धारित किया गया है। कंपनियों ने अक्टूबर महीने में लिए गए सैंपल्स की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वर्ष 2005 के सरकारी आदेश और 2024 की मार्केटिंग डिसिप्लिन गाइडलाइंस के तहत तय नियमों का पालन नहीं किया गया।
कर्नाटक सरकार के आंकड़े और नुकसान का दावा
दूसरी ओर, कर्नाटक सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के मंत्री रिजवान अरशद ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह देश की जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करे। कर्नाटक सरकार के आंकड़ों के अनुसार:
- माइलेज में गिरावट: यदि एथेनॉल की अधिकता के कारण गाड़ियों के माइलेज में 10% की कमी आती है, तो देश भर के वाहन चालकों को सालाना लगभग 62,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा।
- रखरखाव का खर्च: इंजन खराब होने और बार-बार सर्विसिंग कराने की वजह से उपभोक्ताओं पर 39,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।
फिलहाल, केंद्र सरकार और तेल कंपनियों के इस ताजा खुलासे के बाद E20 पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर चल रहा विवाद और गहरा गया है, जहां एक तरफ सरकार इसे पूरी तरह सुरक्षित बता रही है, वहीं विपक्षी दल उपभोक्ताओं को हो रहे नुकसान का मुद्दा जोर-शोर से उठा रहे हैं।

