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UP: ‘हिंदू ही नहीं, हिंदुत्व भी खतरे में’—विहिप महामंत्री, भागवताचार्यों से जन-जागरण का आह्वान

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वृंदावन (मथुरा)। उत्तर प्रदेश के वृंदावन में आयोजित विश्व हिंदू परिषद की आचार्य व्यास पीठ विमर्श बैठक में सनातन धर्म और हिंदू समाज की वर्तमान चुनौतियों पर गहन मंथन हुआ। बैठक का आयोजन कृष्ण कृपा धाम आश्रम में भागवताचार्य संजीव कृष्ण ठाकुर के निर्देशन में किया गया, जिसमें ब्रज क्षेत्र सहित देश के विभिन्न प्रांतों से आए विहिप पदाधिकारी और व्यासाचार्य शामिल हुए।

बैठक को संबोधित करते हुए विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा ने कहा कि आज केवल हिंदू समाज ही नहीं, बल्कि हिंदुत्व भी गंभीर चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि यह चुनौती सिर्फ बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक भी है, जिसमें संस्कारों का क्षरण एक बड़ा विषय बनकर उभरा है। इसी को ध्यान में रखते हुए विहिप समाज में प्रबोधन और जागरण के लिए एक व्यापक कार्ययोजना पर काम कर रही है।

बजरंग लाल बागड़ा ने स्पष्ट किया कि भागवताचार्यों और संतों के माध्यम से यह संदेश जन-जन तक पहुंचाया जाएगा, ताकि समाज को संगठित और जागरूक किया जा सके। उन्होंने दोहराया कि सनातन धर्म अनादि है और अनंत काल तक रहेगा, लेकिन इसके लिए समाज को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।

भागवताचार्य संजीव कृष्ण ठाकुर ने हिंदू समाज की घटती जनसंख्या, पारिवारिक विघटन और बढ़ते तलाक पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए आवश्यक है कि हिंदू समाज में विवाह समय पर हों और युवा पीढ़ी भटकाव से बचे। उन्होंने सभी जातियों को साथ लाने पर जोर देते हुए कहा कि जैसे एक संगीत मंडली में हर वर्ग के लोग मिलकर स्वर बनाते हैं, वैसे ही हिंदू समाज में भी समरसता होनी चाहिए।

इस अवसर पर स्वामी कृष्णानंद ने कहा कि संत, धर्माचार्य और भागवताचार्य अपने-अपने कार्यक्रमों के माध्यम से समाज को जागरूक करें और जातिगत भेदभाव को समाप्त कर एकजुटता का संदेश दें।

विहिप के केंद्रीय मंत्री अशोक तिवारी ने कहा कि हिंदू समाज के विभिन्न वर्गों के बीच की दूरी को समाप्त कर एक मजबूत और संगठित समाज खड़ा करने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाई जा रही है। वहीं ब्रज प्रांत अध्यक्ष कन्हैया लाल अग्रवाल ने कहा कि जब तक समाज का हर वर्ग कंधे से कंधा मिलाकर नहीं चलेगा, तब तक चुनौतियों का समाधान संभव नहीं है।

बैठक में प्रांत धर्माचार्य प्रमुख ओमप्रकाश, डॉ. मनोज मोहन शास्त्री, आचार्य मृदुल कांत शास्त्री, योगेश गौतम, डॉ. नितिन चौधरी, पवन शर्मा, मुकेश खांडेकर सहित अनेक संत, आचार्य और विहिप पदाधिकारी मौजूद रहे।

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