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INS Kesari: विशाखापत्तनम डॉकयार्ड में INS केसरी में घुसा पानी, कोई हताहत नहीं

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विशाखापत्तनम के नेवल डॉकयार्ड में भारतीय नौसेना से जुड़ी एक बड़ी घटना सामने आई है। शनिवार दोपहर को नौसेना के प्रमुख युद्धपोत INS केसरी में अचानक पानी घुस गया। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान या किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है। भारतीय नौसेना के अधिकारियों ने स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में होने की पुष्टि की है।

विशाखापत्तनम नेवल डॉकयार्ड की घटना

भारतीय नौसेना के प्रवक्ता द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह घटना शनिवार दोपहर की है जब INS केसरी विशाखापत्तनम स्थित नेवल डॉकयार्ड में खड़ा हुआ था। अचानक जहाज के भीतर पानी घुसने की सूचना मिलते ही नौसेना के तकनीकी दल हरकत में आ गए। वर्तमान में जहाज से पानी बाहर निकालने का काम युद्धस्तर पर जारी है और स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

क्या है INS केसरी? (जहाज का परिचय)

INS केसरी भारतीय नौसेना का एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा जंगी जहाज है, जिसे टैंक लैंडिंग शिप (LST) के रूप में जाना जाता है। इस पोत को पूरी तरह से भारत में ही तैयार किया गया था और साल 2008 में इसे भारतीय नौसेना बेड़े में शामिल किया गया था।

इस युद्धपोत की मुख्य जिम्मेदारी युद्ध या आपातकालीन परिस्थितियों में सेना के जवानों, भारी बख्तरबंद टैंकों और अन्य सैन्य वाहनों को समुद्र के रास्ते सीधे तटीय इलाकों तक पहुंचाना है। इसके अलावा, यह जहाज विभिन्न रक्षा मिशनों के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत कार्यों, मानवीय सहायता पहुंचाने और विदेशों में दवाइयां व राहत सामग्री भेजने में भी अहम भूमिका निभाता रहा है।

भारतीय नौसेना के जहाजों में पहले भी आ चुकी हैं ऐसी तकनीकी समस्याएं

भारतीय नौसेना के जहाजों और पनडुब्बियों में पानी घुसने या दुर्घटनाओं का यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में इस तरह की कई अन्य घटनाएं भी दर्ज की जा चुकी हैं, जिनका विवरण नीचे दिया गया है:

मौजूदा स्थिति और आगे की कार्रवाई

फिलहाल विशाखापत्तनम डॉकयार्ड में खड़े INS केसरी से पानी निकालने का अभियान पूरी मुस्तैदी के साथ चलाया जा रहा है। नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और सुरक्षा के सभी आवश्यक मानकों का पालन किया जा रहा है। घटना के कारणों की तकनीकी जांच भी की जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

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