कोइरीपुर सुलतानपुर : कोइरीपुर नगर पंचायत में बीते वर्षों में यदि किसी एक विकास कार्य को गिनाया जाए, तो वह केवल रेलवे स्टेशन मार्ग पर बना पुल ही है। इसके अलावा आज भी कस्बा शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के मामले में उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल के निर्माण को छोड़ दें, तो नगर पंचायत में कोई ऐसा ठोस विकास कार्य नहीं हुआ, जिससे आम नागरिकों की रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान हो सके।
कोइरीपुर और आसपास के दर्जनों गांवों को जोड़ने वाला पुराना लकड़ी का पुल वर्षों तक लोगों की मजबूरी बना रहा। रेलवे स्टेशन और बाजार तक पहुंचने का यही एकमात्र रास्ता था। पुल की जर्जर हालत के बावजूद हजारों लोग रोज़ाना जान जोखिम में डालकर इसे पार करते थे। लंबे समय तक मांग और संघर्ष के बाद वर्ष 2019-20 में पुराने लकड़ी के पुल की जगह नया आरसीसी पुल बनाया गया। पुल के पास लगे शिलापट्ट के अनुसार इसका निर्माण लोक निर्माण विभाग, निर्माण खंड संख्या-3 सुल्तानपुर के माध्यम से कराया गया, जिसकी लागत लगभग 2.02 करोड़ रुपये रही।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पुल निश्चित रूप से एक बड़ी राहत है और वर्षों की मांग के बाद मिला यह विकास कार्य कोइरीपुर के लिए जरूरी भी था। लेकिन सवाल यह है कि क्या यही विकास पर्याप्त है? आज भी कोइरीपुर में न तो समुचित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं और न ही उच्च स्तरीय शैक्षणिक संस्थान। गंभीर बीमारी की स्थिति में लोगों को सुल्तानपुर या अन्य जिलों की ओर भागना पड़ता है। वहीं, शिक्षा के लिए भी छात्रों को कस्बे से बाहर जाना मजबूरी बना हुआ है।
नगर के लोगों का आरोप है कि पुल बनने के बाद विकास की गति वहीं थम गई। न तो स्वास्थ्य ढांचे में कोई बड़ा सुधार हुआ और न ही शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाए गए। सड़क, नाली, पेयजल और साफ-सफाई जैसी समस्याएं भी आज तक जस की तस बनी हुई हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पुल को विकास का प्रमाण बताकर जिम्मेदार लोग अपने कर्तव्यों से बच नहीं सकते। कोइरीपुर आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। लोगों की मांग है कि जिस तरह पुल के लिए प्रयास किए गए, उसी गंभीरता से स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी काम किया जाए, ताकि कोइरीपुर को वास्तव में एक विकसित नगर पंचायत का दर्जा मिल सके।

