प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में विश्व बैंक की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए देश में आर्थिक सुधार और गरीबी उन्मूलन को लेकर महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि भारत में आर्थिक असमानता में तेजी से कमी आई है और पिछले कुछ वर्षों में करोड़ों लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकालने में बड़ी सफलता मिली है।
विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
प्रधानमंत्री द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, विश्व बैंक ने अक्टूबर 2026 में ‘इंडिया पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ’ नाम से एक रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट में भारत में आर्थिक विकास, गरीबी दर और सामाजिक-आर्थिक स्थिति में आए बदलावों का व्यापक विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2011 से 2023 के बीच देश में कुल 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं।
इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस अवधि के दौरान देश में अत्यधिक गरीबी की दर में रिकॉर्ड 90% की भारी कमी दर्ज की गई है। आंकड़े बताते हैं कि भारत में अत्यधिक गरीबी की दर जो साल 2011 में 27.1% थी, वह घटकर वर्ष 2023 में मात्र 2.6% पर आ गई है।
पिछले 6 वर्षों में रोजगार के 13.4 करोड़ नए अवसर
गरीबी उन्मूलन के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में रोजगार सृजन को लेकर भी आंकड़े प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि पिछले 6 वर्षों में रोजगार के 13.4 करोड़ नए अवसर बढ़े हैं। प्रधानमंत्री के अनुसार, रोजगार सृजन की यह रफ्तार कामकाजी उम्र वाली आबादी में हुई कुल बढ़ोतरी से लगभग दोगुनी है, जो देश के आर्थिक विकास और श्रम बाजार की मजबूती को दर्शाती है।
- गरीबी में कमी: 2011 से 2023 के बीच 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए।
- अत्यधिक गरीबी दर: 2011 के 27.1% से घटकर 2023 में 2.6% पर पहुंची।
- रोजगार वृद्धि: पिछले 6 वर्षों में रोजगार के 13.4 करोड़ नए अवसर सृजित हुए।
- आर्थिक असमानता: देश में आर्थिक असमानता के स्तर में भी तेज गिरावट आई है।
आर्थिक असमानता में आई तेजी से कमी
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि देश में केवल गरीबी ही कम नहीं हुई है, बल्कि आर्थिक असमानता में भी तेजी से कमी आई है। सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) प्रणाली और बुनियादी ढांचे के विकास के कारण समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक आर्थिक लाभ पहुंचा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि विश्व बैंक के ये आंकड़े भारत की आर्थिक नीतियों की सफलता और समावेशी विकास की दिशा में उठाए गए कदमों की पुष्टि करते हैं। हालांकि, इस दिशा में अभी और प्रयास किए जा रहे हैं ताकि देश के हर नागरिक के जीवन स्तर में सुधार लाया जा सके।

