उत्तर प्रदेश के रामपुर से आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने अपनी दूसरी पदयात्रा की शुरुआत की है। इस पदयात्रा का नाम उन्होंने ‘वोट बचाओ, संविधान बचाओ’ रखा है। 21 दिसंबर 2025 को शुरू हुई इस यात्रा के जरिए संजय सिंह ने चुनावी प्रक्रिया, लोकतंत्र और संविधान को लेकर अपनी चिंताओं को सीधे जनता के सामने रखने की कोशिश की है। पदयात्रा की शुरुआत के साथ ही उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखे सवाल भी खड़े किए।
रामपुर में पदयात्रा की शुरुआत करते हुए संजय सिंह ने कहा कि आज देश में नफरत और डर की राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है, जबकि लोकतंत्र की बुनियाद भरोसे और भाईचारे पर टिकी होती है। उनका कहना था कि “नफरत से न देश चलता है, न समाज आगे बढ़ता है।” उन्होंने साफ कहा कि यह पदयात्रा किसी एक पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि संविधान और मतदाता के अधिकारों की रक्षा के लिए है।
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में चुनावी प्रक्रिया पर सवाल बढ़े हैं और वोटर लिस्ट से लेकर मतदान प्रणाली तक को लेकर आम लोगों के मन में doubts पैदा हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर नागरिक का वोट उसकी सबसे बड़ी ताकत है और अगर वही सुरक्षित नहीं रहेगा, तो लोकतंत्र कमजोर हो जाएगा। इसी सोच के साथ उन्होंने ‘वोट बचाओ, संविधान बचाओ’ का नारा दिया है।
इस पदयात्रा के दौरान संजय सिंह रामपुर के अलग-अलग इलाकों में लोगों से मिलते नजर आए। उन्होंने स्थानीय नागरिकों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं। उनका कहना था कि लोगों में बेरोजगारी, महंगाई और शिक्षा को लेकर चिंता है, लेकिन इन मुद्दों पर बात करने के बजाय राजनीति को नफरत की दिशा में मोड़ा जा रहा है।
AAP सांसद ने यह भी कहा कि संविधान देश को जोड़ने वाला दस्तावेज है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें संविधान की मूल भावना को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। संजय सिंह के मुताबिक, अगर संविधान सुरक्षित रहेगा तो हर नागरिक के अधिकार सुरक्षित रहेंगे, चाहे वह किसी भी धर्म, जाति या वर्ग से हो।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पदयात्रा आम आदमी पार्टी की उत्तर प्रदेश में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकती है। हालांकि संजय सिंह ने इसे चुनावी यात्रा मानने से इनकार किया और कहा कि यह एक जन आंदोलन है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने के लिए किया जा रहा है।
पदयात्रा के दौरान संजय सिंह ने केंद्र सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए समाज को बांटने की राजनीति की जा रही है। उनके मुताबिक, देश की जनता अब इन बातों को समझने लगी है और वह अपने अधिकारों को लेकर जागरूक हो रही है।
रामपुर में पदयात्रा को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। स्थानीय प्रशासन की तरफ से पुलिस बल तैनात किया गया, ताकि किसी भी तरह की law and order की समस्या न हो। पदयात्रा शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ती नजर आई।
संजय सिंह ने कहा कि उनकी यह यात्रा आगे भी उत्तर प्रदेश के कई जिलों से होकर गुजरेगी। उन्होंने दावा किया कि वह हर उस नागरिक तक पहुंचने की कोशिश करेंगे, जो अपने वोट और संविधान को लेकर चिंतित है। उन्होंने युवाओं से खास अपील की कि वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से हिस्सा लें और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें।
वहीं, विपक्षी दलों की तरफ से इस पदयात्रा को राजनीतिक स्टंट बताया जा रहा है। कुछ नेताओं का कहना है कि चुनाव नजदीक आते ही इस तरह की यात्राएं शुरू हो जाती हैं। हालांकि AAP का कहना है कि यह मुद्दों की राजनीति है, न कि सिर्फ सत्ता की।
कुल मिलाकर, रामपुर से शुरू हुई ‘वोट बचाओ, संविधान बचाओ’ पदयात्रा ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह यात्रा कितना असर डालती है और जनता इसे किस नजरिए से देखती है।

