Site icon News Hub Hindi

Satyanand Stokes: अमेरिका से हिमाचल आए शख्स ने बदली पहाड़ों की किस्मत, आज भी सेब के हर बाग में जिंदा है योगदान

breaking news

Satyanand Stokes Jayanti: जानिए सत्यानंद स्टोक्स कौन थे और कैसे अमेरिका से हिमाचल आकर उन्होंने 1916 में सेब की खेती को बढ़ावा दिया।

शिमला। हिमाचल प्रदेश को आज “एप्पल स्टेट” के नाम से जाना जाता है। राज्य की अर्थव्यवस्था, लाखों किसानों की आय और पहाड़ों की पहचान काफी हद तक सेब बागवानी पर टिकी हुई है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस क्रांति की नींव एक अमेरिकी युवक ने रखी थी। उस युवक का नाम था सैमुअल इवांस स्टोक्स, जिन्हें बाद में दुनिया सत्यानंद स्टोक्स के नाम से जानने लगी।

सेवा के लिए आए, हिमाचल को अपना घर बना लिया

सैमुअल इवांस स्टोक्स का जन्म 16 अगस्त 1882 को अमेरिका के फिलाडेल्फिया में एक समृद्ध परिवार में हुआ था। वर्ष 1904 में मात्र 22 वर्ष की उम्र में वह भारत आए। उनका उद्देश्य कुष्ठ रोगियों की सेवा करना था। उन्होंने शिमला के पास सुबाथू क्षेत्र में काम किया और धीरे-धीरे हिमाचल के लोगों तथा यहां की संस्कृति से गहरा जुड़ाव महसूस करने लगे।

बाद में उन्होंने कोटगढ़ क्षेत्र में बसने का निर्णय लिया, स्थानीय युवती से विवाह किया और भारतीय जीवनशैली अपना ली। आगे चलकर उन्होंने हिंदू धर्म स्वीकार किया और अपना नाम सत्यानंद स्टोक्स रख लिया।

एक विचार जिसने बदल दी पहाड़ों की तकदीर

20वीं सदी की शुरुआत में हिमाचल के पहाड़ी क्षेत्रों में लोगों की आय के सीमित साधन थे। खेती मुख्य रूप से जीविकोपार्जन तक सीमित थी। स्टोक्स ने देखा कि हिमाचल की जलवायु अमेरिका के कुछ सेब उत्पादक क्षेत्रों जैसी है। उन्होंने जोखिम उठाते हुए अमेरिका से रेड डिलीशियस किस्म के सेब के पौधे और कलमें मंगाईं और 1916 में कोटगढ़-थानेदार क्षेत्र में उनका रोपण किया।

शुरुआत सफल रही। सेब की फसल ने किसानों को पारंपरिक खेती की तुलना में कहीं अधिक आय दी। इसके बाद आसपास के किसानों ने भी सेब बागवानी अपनानी शुरू कर दी और धीरे-धीरे पूरा क्षेत्र सेब उत्पादन का केंद्र बन गया।

हिमाचल की अर्थव्यवस्था में आई क्रांति

स्टोक्स द्वारा शुरू की गई सेब बागवानी आज हिमाचल प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण बागवानी गतिविधियों में शामिल है। राज्य के हजारों गांव और लाखों परिवार सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से सेब उद्योग से जुड़े हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सेब उत्पादन ने पहाड़ी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और जीवन स्तर में बड़ा बदलाव लाने में भूमिका निभाई।

आज हिमाचल में एक लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सेब की खेती होती है और यह उद्योग राज्य को हर वर्ष हजारों करोड़ रुपये का आर्थिक योगदान देता है।

स्वतंत्रता संग्राम में भी निभाई भूमिका

सत्यानंद स्टोक्स केवल किसान या बागवान ही नहीं थे। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भी सक्रिय भागीदारी निभाई। जलियांवाला बाग हत्याकांड से प्रभावित होकर वे राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़े और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ काम किया। स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा।

आज भी जिंदा है उनका योगदान

हिमाचल सरकार ने उनके योगदान को सम्मान देने के लिए कोटगढ़-थानेदार क्षेत्र को “सत्यानंद स्टोक्स ट्रेल” के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी। राज्य के लोग आज भी उन्हें उस व्यक्ति के रूप में याद करते हैं जिसने पहाड़ों की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी।

क्यों याद किए जाते हैं सत्यानंद स्टोक्स?

आज जब हिमाचल का सेब देश और दुनिया के बाजारों में अपनी पहचान बना चुका है, तब हर सेब के बाग में कहीं न कहीं सत्यानंद स्टोक्स की दूरदृष्टि और मेहनत की छाप दिखाई देती है।

Exit mobile version