सुलतानपुर जनपद में सरकारी कार्य के दौरान कर्मचारियों से बदसलूकी और मारपीट का मामला सामने आया है। पिलखिनी गांव में आयोजित बिजली बिल वसूली शिविर के दौरान एक बकायेदार द्वारा विद्युत विभाग के कर्मचारियों के साथ कथित तौर पर मारपीट करने और जातिसूचक गालियां देने का आरोप लगा है। इस घटना से मौके पर अफरा-तफरी मच गई और सरकारी कार्य बाधित हो गया।
मामला मंगलवार दोपहर का बताया जा रहा है। विद्युत उपकेंद्र गारवपुर के अंतर्गत पिलखिनी गांव में विभागीय कर्मचारियों की टीम बकाया बिलों की वसूली और बकायेदार उपभोक्ताओं के कनेक्शन विच्छेदन के लिए शिविर लगा रही थी। टीम में ज्ञान चंद पाल (टी4एच), अवनीश कुमार (टीयूआई लाइन स्टाफ, संविदा), मनोज भौयी (संविदा स्टाफ) और मीटर रीडर उमेश कुमार सरोज शामिल थे।
इसी दौरान गांव निवासी भुआल सिंह पुत्र स्वर्गीय सत्यनारायण सिंह ने अपने बकाया बिजली बिल पर कनेक्शन काटे जाने का विरोध शुरू कर दिया। आरोप है कि विरोध के दौरान वह उग्र हो गया और कर्मचारियों को जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए अपमानित करने लगा। स्थिति तब और बिगड़ गई जब उसने संविदा कर्मी मनोज भौयी को गर्दन से पकड़कर खींचा और मीटर रीडर उमेश कुमार सरोज को गालियां देते हुए वहां से भगाने की कोशिश की।
घटना को देख आसपास मौजूद ग्रामीणों ने बीच-बचाव कर किसी तरह स्थिति को शांत कराया, जिससे बड़ा हादसा टल सका। हालांकि, इस दौरान सरकारी कार्य पूरी तरह बाधित हो गया और कर्मचारियों में भय का माहौल बन गया।
घटना के बाद विद्युत विभाग के कर्मचारियों ने थाना कोतवाली लंभुआ में आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। कर्मचारियों का कहना है कि आरोपी ने न सिर्फ मारपीट की, बल्कि सरकारी कार्य में जानबूझकर बाधा डाली, जो गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने आरोपी के खिलाफ सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।
इस संबंध में लंभुआ थाना प्रभारी संदीप राय ने बताया कि उन्हें अभी तक लिखित तहरीर प्राप्त नहीं हुई है। उनका कहना है कि तहरीर व्हाट्सएप के माध्यम से भेजे जाने की बात कही गई है, लेकिन वह उन्हें नहीं मिली। वहीं पीड़ित कर्मचारियों का दावा है कि तहरीर थाने में मौजूद दीवान को सौंपी जा चुकी है।
यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा कितनी पुख्ता है और बकाया वसूली जैसे आवश्यक कार्यों के दौरान उन्हें किस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। अगर ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो सरकारी कार्य करना और भी मुश्किल हो सकता है।

