सुलतानपुर के दूबेपुर गांव में भूमि विवाद को लेकर हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। बुधवार को गांव के ग्रामीणों और पीड़ित परिवार ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए राजस्व अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए।
पीड़ित पारसनाथ वर्मा और उनके भाइयों का कहना है कि उन्होंने गाटा संख्या 769 और 770 की भूमि विधिवत रूप से खरीदी थी। बैनामे के दौरान उनके रिश्तेदार श्यामलाल और सुंदरा देवी को केवल गवाह के रूप में बुलाया गया था, लेकिन आरोप है कि उन्होंने दस्तावेज लेखक से मिलीभगत कर बैनामे में स्वयं को हिस्सेदार दर्ज करा लिया।
1992 में हुआ था सुलह समझौता
पीड़ित पक्ष के अनुसार, 25 जून 1992 को दोनों पक्षों के बीच सुलह-समझौता हुआ था, जिसकी नोटरी भी कराई गई थी। समझौते के तहत अमहट–भादर रोड के पश्चिम की ओर स्थित गाटा संख्या 769 श्यामलाल और सुंदरा देवी को दी गई थी, जबकि सड़क के पूरब स्थित गाटा संख्या 709 और 770 पारसनाथ वर्मा और उनके भाइयों के हिस्से में आई थी।
श्यामलाल की मृत्यु के बाद उनके उत्तराधिकारियों और सुंदरा देवी ने कथित रूप से अपने हिस्से से अधिक भूमि का बैनामा शंकरपुरम करौंदिया निवासी मनजीत सिंह के नाम कर दिया। आरोप है कि बैनामे में गलत चौहद्दी दर्शाई गई और पुराने समझौते को नजरअंदाज किया गया।
कोर्ट में चल रहा मामला, फिर भी कब्जे की कोशिश का आरोप
इस विवाद को लेकर दीवानी न्यायालय में बंटवारे का वाद दायर किया गया था, जिसे 7 जनवरी 2026 को खारिज कर दिया गया। इसके बाद 13 जनवरी 2026 को पारसनाथ वर्मा बनाम मनजीत सिंह के नाम से गाटा संख्या 769 और 770 के संबंध में एसडीएम न्यायालय में नया वाद दायर किया गया, जिसे उसी दिन अपर उपजिलाधिकारी न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि वाद विचाराधीन होने के बावजूद मनजीत सिंह के दबाव में नायब तहसीलदार दुर्गेश यादव, कानूनगो रामपाल मिश्रा और लेखपालों को पीड़ित पक्ष की जमीन पर कब्जा दिलाने के लिए भेजा गया।
आगजनी और धमकी के आरोप
आरोप है कि 19 जनवरी को मनजीत सिंह मजदूरों और मिस्त्रियों के साथ मौके पर पहुंचे और कब्जा करने का प्रयास किया। इस दौरान पीड़ित के सरिया और पुआल में आग लगा दी गई। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि जब घर की महिलाएं मवेशियों को खोलने लगीं, तो नायब तहसीलदार द्वारा आपत्तिजनक और हिंसा भड़काने वाला बयान दिया गया।
आगजनी की घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है। पीड़ित परिवार की महिलाएं आज भी घर के बाहर बैठकर पहरा दे रही हैं। बताया जा रहा है कि घटना के कई दिन बाद भी जली हुई पुआल से धुआं उठ रहा है।
दूसरे पक्ष का दावा
वहीं मनजीत सिंह का कहना है कि दोनों गाटा नंबरों में दो-तिहाई हिस्सा उनका और एक-तिहाई हिस्सा पारसनाथ वर्मा का है। उनका आरोप है कि पारसनाथ अपने हिस्से से अधिक भूमि पर कब्जा किए हुए हैं।
इस संबंध में लेखपाल सुनील मिश्र ने बताया कि सोमवार को हुई घटना के बाद कब्जा मुक्त कराए जाने की प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है और उच्चाधिकारियों के आदेश का इंतजार किया जा रहा है।

