सुल्तानपुर के मेडिकल कॉलेज की ओपीडी सोमवार को मरीजों की लाचारी और बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर बन गई। छुट्टी के बाद ओपीडी खुलते ही मरीजों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पर्चा बनवाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने और दवा लेने तक मरीजों को तीन से चार घंटे तक इंतजार करना पड़ा। इलाज से पहले ही कई मरीज थककर बैठ गए।
पुरुष अस्पताल की ओपीडी में करीब 2000 नए मरीजों का पंजीकरण हुआ, जबकि महिला अस्पताल में 750 से अधिक मरीज पहुंचे। इसके अलावा पुराने मरीजों की भी भारी भीड़ रही। हालात ऐसे रहे कि ओपीडी परिसर में खड़े होने तक की जगह नहीं बची। बैठने की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सीढ़ियों और जमीन पर बैठने को मजबूर दिखे।
मेडिकल कॉलेज की नई बिल्डिंग की सीढ़ियों पर बैठे मरीजों को सुरक्षाकर्मी हटाते नजर आए, जबकि कई लोग थकान के कारण फर्श पर ही बैठ गए। दवा काउंटर पर खड़े बुजुर्ग राम निरंजन कमजोरी के चलते फर्श पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करते दिखे। यह दृश्य मरीजों की लाचारी को साफ बयान कर रहा था।
फिजिशियन, हड्डी रोग और जनरल सर्जरी विभाग की ओपीडी के बाहर सबसे लंबी कतारें लगी रहीं। मौसम बदलने के कारण सर्दी, जुकाम, बुखार और खांसी के मरीज सबसे अधिक पहुंचे। रामनयन ने बताया कि सुबह 10 बजे से लाइन में लगे हैं, लेकिन दो घंटे बाद भी नंबर नहीं आया। राम सुमेर ने कहा कि दर्द से परेशान हैं, इलाज से पहले ही हालत बिगड़ रही है।
डॉक्टर को दिखाने के बाद भी मरीजों की परेशानी खत्म नहीं हुई। दवा वितरण काउंटर पर महिला, पुरुष और बुजुर्गों के लिए अलग व्यवस्था होने के बावजूद लंबी कतारें लगी रहीं। मो. असलम ने बताया कि डॉक्टर को दिखाने में दो घंटे लग गए और अब दवा के लिए फिर लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
जांच के लिए मरीजों को और ज्यादा लाचारी झेलनी पड़ी। ओपीडी नई बिल्डिंग में है, लेकिन एक्सरे की सुविधा पुरानी बिल्डिंग में होने के कारण मरीजों को ऊबड़-खाबड़ रास्ते से ले जाया गया। सप्ताह में सिर्फ दो दिन अल्ट्रासाउंड होने से भीड़ और बढ़ जाती है।
मरीज अंबुज कोरी ने कहा कि हर सोमवार यही हालात होते हैं। मरीजों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन न पंजीकरण काउंटर बढ़े, न डॉक्टर और न ही बैठने की व्यवस्था। नतीजा यह है कि सुल्तानपुर का मेडिकल कॉलेज मरीजों के लिए इलाज से पहले परीक्षा बन चुका है।
कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. प्रियांक वर्मा ने बताया कि छुट्टी के कारण सोमवार को भीड़ अधिक रहती है और व्यवस्था सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन मरीजों का कहना है कि जमीन पर हालात अभी भी बदले नहीं हैं।

