सुल्तानपुर जिले की इकलौती किसान सहकारी चीनी मिल बंद किए जाने के बाद गन्ना किसानों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया। केन कमिश्नर के आदेश पर मंगलवार देर शाम मिल में पेराई कार्य रोक दिया गया, जिसके विरोध में बुधवार को किसानों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में विभिन्न किसान संगठनों और राजनीतिक दलों के नेता भी शामिल हुए।
मंगलवार को मिल बंद होने की सूचना मिलते ही गन्ना लेकर पहुंचे किसानों ने तौल कराने से इनकार कर दिया। बुधवार सुबह बड़ी संख्या में किसान मिल परिसर में एकत्र हुए और धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। कुछ ही देर में भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। भाकियू के प्रदेश सचिव अजय सिंह टुनटुन ने कहा कि जिले की एकमात्र चीनी मिल बंद होने से हजारों गन्ना किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि किसान अपना गन्ना हैदरगढ़ चीनी मिल को नहीं बेचेंगे।
किसान संगठनों ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते हुए मिल चालू रखने की मांग की। समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक अरुण वर्मा ने किसानों की मांगों को उचित बताया। वहीं सदर विधायक राज प्रसाद उपाध्याय भी मिल पहुंचे और संचालन बहाल कराने का आश्वासन दिया।
केन कमिश्नर के आदेश के बाद फिलहाल मिल में पेराई कार्य पूरी तरह रोक दिया गया है। हालांकि किसानों की समस्या को देखते हुए मिल परिसर में गन्ने की तौल की व्यवस्था की गई है। इसके लिए ऑटोमेटिक धर्मकांटा हैदरगढ़ से मंगाया गया है। चीनी मिल की जीएम अंजली गंगवार ने बताया कि किसानों की सुविधा के लिए तौल जारी रखी जाएगी।
चीनी मिल बंद होने से लगभग 6150 गन्ना किसानों के भुगतान पर संकट खड़ा हो गया है। मिल पर किसानों का करीब 18.48 करोड़ रुपये बकाया है। इसके अलावा हैदरगढ़ मिल से संबद्ध होने के कारण किसानों को भाड़ा खर्च के रूप में लगभग 12 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त नुकसान भी उठाना पड़ेगा। जिले में करीब 6500 गन्ना किसान इस मिल पर निर्भर हैं, जबकि लगभग 250 किसानों का गन्ना अभी खेतों में ही खड़ा है।
1984 में स्थापित यह सहकारी चीनी मिल लंबे समय से तकनीकी खराबियों और उत्पादन में गिरावट से जूझ रही थी। इस सत्र में मिल 55 दिनों में लगभग 96 घंटे बंद रही। चीनी का परता घटकर 6.80 प्रतिशत रह गया था, जिससे मिल लगातार घाटे में चल रही थी। इसी कारण अधिकारियों ने मिल को बंद करने का निर्णय लिया। मिल बंद होने से लगभग 350 कर्मचारियों की आजीविका पर भी असर पड़ने की आशंका है।

