महाराष्ट्र।
अजित पवार के निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने के फैसले ने महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल ला दिया है। यह सियासी विवाद लगातार गहराता जा रहा है और अब इस फैसले के पीछे के ‘मास्टरमाइंड’ को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
इस मुद्दे को उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना (UBT) के मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित एक लेख के जरिए और हवा मिल गई है। लेख में दावा किया गया है कि सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम बनाए जाने का फैसला अचानक लिया गया और इसकी जानकारी शरद पवार, सुप्रिया सुले या पवार परिवार के किसी अन्य वरिष्ठ सदस्य को पहले से नहीं थी।
सामना में सीधे तौर पर बीजेपी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। लेख में कहा गया है कि यह फैसला राजनीतिक रणनीति के तहत लिया गया, जिसका उद्देश्य पवार परिवार और एनसीपी की आंतरिक राजनीति को प्रभावित करना है। लेख में यह भी संकेत दिया गया है कि सत्ता संतुलन और राजनीतिक लाभ के लिए यह कदम उठाया गया।
इस पूरे घटनाक्रम पर शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने संवेदनशील समय में, बिना व्यापक राजनीतिक और पारिवारिक सहमति के, सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम बनाने की इतनी जल्दबाजी क्यों की गई। राउत ने कहा कि यह फैसला न केवल असामान्य है, बल्कि इसके पीछे की मंशा पर भी सवाल खड़े करता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला महाराष्ट्र की सत्ता राजनीति में एक नया मोड़ साबित हो सकता है। जहां एक ओर इसे सहानुभूति और स्थिरता के नाम पर लिया गया कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे राजनीतिक प्रयोग और सत्ता प्रबंधन का हिस्सा बता रहा है।
फिलहाल, सुनेत्रा पवार की नियुक्ति को लेकर सियासी बयानबाज़ी तेज है और आने वाले दिनों में इस फैसले के पीछे के असली सूत्रधार को लेकर और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

