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यूपी में मौरंग-बालू महंगे: कैबिनेट फैसले से बढ़ेंगे निर्माण खर्च

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उत्तर प्रदेश।
प्रदेश में घर बनाना और विकास कार्य कराना अब और महंगा होने जा रहा है। यूपी कैबिनेट ने मौरंग, बालू समेत निर्माण में इस्तेमाल होने वाले उपखनिजों की रॉयल्टी और डेड रेंट (न्यूनतम किराया) बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद भवन निर्माण, सड़क निर्माण और अन्य development projects की लागत बढ़ने की आशंका है।

कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश खनिज परिहार नियमावली-2021 में दूसरे संशोधन को स्वीकृति दी है। खनन विभाग के अनुसार, नदी तल से मिलने वाली मौरंग की न्यूनतम रॉयल्टी 150 रुपये से बढ़ाकर 190 रुपये प्रति घन मीटर कर दी गई है। वहीं पहाड़ों के क्षरण से मिलने वाली लाल मौरंग की दर 75 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये प्रति घन मीटर तय की गई है।

बालू, सिलिका सैंड और ग्रेनाइट भी महंगे

सरकार ने साधारण बालू की रॉयल्टी में भी 15 रुपये प्रति घन मीटर की बढ़ोतरी की है।
सिलिका सैंड की रॉयल्टी 100 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति टन कर दी गई है।
इसके अलावा ग्रेनाइट की दरों में भी इजाफा किया गया है—

डेड रेंट में भी बड़ा इजाफा

उपखनिजों के वार्षिक न्यूनतम किराये (Dead Rent) में भी बढ़ोतरी की गई है।

तत्काल असर नहीं, लेकिन आगे बढ़ेगा खर्च

खनन विभाग का कहना है कि प्रदेश की अधिकांश खदानें पहले से ही नीलामी के जरिए ऊंची दरों पर उठाई जा रही हैं, इसलिए इस बढ़ोतरी का तत्काल असर बाजार कीमतों पर नहीं पड़ेगा। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इसका असर निर्माण लागत पर जरूर दिख सकता है।

गौरतलब है कि पिछले साल नवंबर में सीमेंट पर GST घटने से लोगों को कुछ राहत मिली थी, लेकिन अब मौरंग, बालू और ग्रेनाइट की दरें बढ़ने से घर बनाना फिर महंगा सौदा साबित हो सकता है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद संशोधित नियमावली के औपचारिक आदेश सोमवार को जारी किए जाएंगे।

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