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यूपी में स्कूल एडमिशन के नियम बदले: कहीं आपके बच्चे का नाम तो नहीं कट जाएगा?

Uttar Pradesh School Rules

उत्तर प्रदेश में शिक्षा को लेकर एक अहम और राहत भरा फैसला सामने आया है। राज्य सरकार ने शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया को पहले से अधिक सरल बना दिया है। नए बदलावों के तहत अब सरकारी और गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों में RTE कोटे से प्रवेश के लिए बच्चे का आधार कार्ड अनिवार्य नहीं रहेगा। सरकार का मानना है कि इस फैसले से उन हजारों गरीब और वंचित परिवारों को राहत मिलेगी, जो अब तक सिर्फ दस्तावेजों की कमी के कारण अपने बच्चों का स्कूल में दाखिला नहीं करा पा रहे थे।

संशोधित व्यवस्था के अनुसार पहले ऑनलाइन आवेदन के समय बच्चे और माता-पिता दोनों के आधार कार्ड जरूरी होते थे। कई मामलों में बच्चों का आधार न होने की वजह से आवेदन निरस्त हो जाता था और योग्य बच्चे भी शिक्षा से वंचित रह जाते थे। अब नए नियमों में यह स्पष्ट किया गया है कि दाखिले के लिए बच्चे का आधार जरूरी नहीं होगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षा तक पहुंच आसान हो और वास्तविक लाभार्थी केवल कागजी औपचारिकताओं के कारण बाहर न हो जाएं।

हालांकि, आधार कार्ड की आवश्यकता पूरी तरह समाप्त नहीं की गई है। नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक आधार कार्ड अब केवल वित्तीय लेन-देन के लिए जरूरी होगा। RTE के तहत निजी स्कूलों को मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि आधार से जुड़े बैंक खाते में ही भेजी जाएगी। आवेदन के दौरान अभिभावक को अपने आधार से लिंक बैंक खाते की जानकारी देनी होगी। इस प्रक्रिया में कम से कम एक अभिभावक का आधार आवश्यक होगा, लेकिन बच्चे का आधार नहीं मांगा जाएगा।

सरकार का कहना है कि यह फैसला RTE अधिनियम की मूल भावना के अनुरूप है। बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अनुसार किसी भी योग्य बच्चे को सिर्फ दस्तावेजों की कमी के कारण शिक्षा से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। राज्य सरकार चाहती है कि शिक्षा का अधिकार वास्तव में उन बच्चों तक पहुंचे, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।

सरकारी आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि RTE अधिनियम के तहत निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में कुल सीटों का 25 प्रतिशत आरक्षण पहले की तरह बना रहेगा। यह प्रावधान नर्सरी, प्री-प्राइमरी या कक्षा 1 जैसी प्रवेश स्तर की कक्षाओं पर लागू होगा। हर जिले में वार्षिक दाखिला लक्ष्य इसी आधार पर तय किया जाएगा।

बच्चों की उम्र को लेकर भी संशोधित नियम तय किए गए हैं। नर्सरी के लिए बच्चे की उम्र तीन वर्ष से अधिक और चार वर्ष से कम होनी चाहिए। एलकेजी के लिए चार वर्ष से अधिक और पांच वर्ष से कम उम्र निर्धारित की गई है, जबकि कक्षा एक में प्रवेश के लिए बच्चे की उम्र छह से सात वर्ष के बीच होनी चाहिए। इन्हीं आयु सीमाओं के आधार पर ऑनलाइन आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।

आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद दस्तावेजों का सत्यापन ब्लॉक शिक्षा अधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी स्तर पर किया जाएगा। स्कूल आवंटन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन लॉटरी सिस्टम के माध्यम से होगी। पहले चरण में सभी सत्यापित आवेदनों का डिजिटलीकरण किया जाएगा। इसके बाद अभिभावक की पसंद और लॉटरी नंबर के आधार पर स्कूल आवंटित किए जाएंगे। अंतिम चयन सूची जिला अधिकारी की मंजूरी के बाद जारी की जाएगी।

कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम RTE व्यवस्था को ज्यादा सरल, व्यावहारिक और समावेशी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। इससे खासकर गरीब, प्रवासी और वंचित परिवारों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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