PM Modi Diwali With Soldiers: पीएम मोदी लगातार 13वीं बार जवानों संग मनाएंगे दिवाली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जवानों के साथ दिवाली मनाने की अनूठी परंपरा

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल लगातार 13वीं बार भारतीय सशस्त्र बलों के जवानों के साथ दीपावली का पावन पर्व मनाने जा रहे हैं। साल 2014 में देश की सत्ता संभालने के बाद से ही प्रधानमंत्री मोदी ने हर साल दिवाली का दिन देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिकों, वीर जवानों और सुरक्षाकर्मियों के नाम करने की परंपरा शुरू की थी। यह पहल न केवल देश के जवानों का मनोबल बढ़ाती है, बल्कि पूरे देश में उनके प्रति अटूट सम्मान और कृतज्ञता का संदेश भी देती है.

पिछले साल INS विक्रांत पर नौसैनिकों के साथ मनाई थी दिवाली

अगर पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो प्रधानमंत्री मोदी ने हर साल देश के अलग-अलग और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाकों में जाकर जवानों के साथ खुशियां बांटी हैं। पिछले साल यानी 2024 में उन्होंने गोवा में स्थित देश के पहले स्वदेशी विमान वाहकपोत INS विक्रांत पर नौसैनिकों के बीच दिवाली मनाई थी। इस दौरान उन्होंने नौसेना के जवानों के साथ समय बिताया और उनकी कार्यप्रणाली का जायजा लिया था। वहीं, साल 2024 के शुरुआती महीनों या अन्य विशेष अवसरों के अलावा, पिछले वर्ष गुजरात के कच्छ क्षेत्र में भी उन्होंने BSF, आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के जवानों को मिठाई खिलाकर उनका हौसला बढ़ाया था.

साल 2014 से अब तक का सफर: सीमावर्ती इलाकों का दौरा

आंकड़ों के मुताबिक, साल 2014 से लेकर अब तक प्रधानमंत्री मोदी कुल 12 बार देश के विभिन्न सीमावर्ती इलाकों का दौरा कर चुके हैं और वहां तैनात जवानों के साथ दिवाली का जश्न मना चुके हैं। इन दौरों के दौरान उन्होंने सियाचिन से लेकर लेह-लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश जैसे कठिन और दुर्गम इलाकों में तैनात सैनिकों के बीच पहुंचकर यह संदेश दिया है कि पूरा देश उनके साथ खड़ा है.

किन राज्यों और क्षेत्रों में सबसे ज्यादा गए पीएम मोदी?

प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 12 वर्षों के दौरों का विश्लेषण करें तो उनकी प्राथमिकताओं में देश के सबसे संवेदनशील और कठिन सीमावर्ती क्षेत्र शामिल रहे हैं:

  • जम्मू-कश्मीर: प्रधानमंत्री मोदी ने अब तक सबसे ज्यादा 3 बार जम्मू-कश्मीर का दौरा कर वहां तैनात सेना और सुरक्षा बलों के जवानों के साथ दिवाली मनाई है।
  • हिमाचल प्रदेश और लद्दाख: प्रधानमंत्री दो-दो बार हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के सीमावर्ती इलाकों में जा चुके हैं, जहां उन्होंने अत्यधिक ठंड और कठिन परिस्थितियों में देश की रक्षा कर रहे जवानों का मुंह मीठा कराया था।
  • इसके अलावा सियाचिन, पंजाब, उत्तराखंड और गुजरात के कच्छ जैसे क्षेत्रों में भी उन्होंने जवानों के साथ यह विशेष दिन बिताया है।

जवानों के साथ त्योहार मनाने का मुख्य उद्देश्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हमेशा से यह मानना रहा है कि देश के असली नायक वे जवान हैं जो अपने परिवारों से दूर रहकर कड़ाके की ठंड, चिलचिलाती धूप या दुर्गम पहाड़ों पर देश की सीमाओं की चौकसी करते हैं। दीवाली जैसे बड़े त्योहार पर जब पूरा देश अपने परिवारों के साथ जश्न मनाता है, तब ये जवान सरहद पर मुस्तैद रहते हैं। उनके इसी समर्पण और बलिदान के सम्मान में प्रधानमंत्री हर साल खुद उनके बीच पहुंचते हैं ताकि वे अकेलापन महसूस न करें और उन्हें यह अहसास हो सके कि पूरा 140 करोड़ देशवासियों का परिवार उनके साथ है.

निष्कर्ष

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लगातार 13वीं बार जवानों के साथ दिवाली मनाने का यह निर्णय भारतीय राजनीति और सैन्य इतिहास में एक अनूठी मिसाल पेश करता है। यह परंपरा न केवल सैनिकों के भीतर राष्ट्र सेवा की भावना को और प्रगाढ़ करती है, बल्कि देश की युवा पीढ़ी को भी सेना के प्रति आदर और सम्मान का पाठ पढ़ाती है.

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