सोनिया गांधी का बड़ा खुलासा: इंदिरा की हत्या के बाद रहता था राजीव की मौत का डर

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हाल ही में ब्रिटिश मीडिया संस्थान ‘द गार्जियन’ को दिए एक विस्तृत इंटरव्यू में अपने जीवन, परिवार और राजनीति से जुड़े कई अहम खुलासे किए हैं। यह बातचीत उनकी आने वाली आत्मकथा ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ पर केंद्रित है, जिसमें उन्होंने इंदिरा गांधी की हत्या के बाद के खौफनाक दौर और अपने पति राजीव गांधी को लेकर लगातार बने डर का जिक्र किया है।

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद छा गया था दहशत का माहौल

इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने बताया कि 31 अक्टूबर 1984 को जब इंदिरा गांधी की उनके ही सिख बॉडीगार्ड्स ने गोली मारकर हत्या कर दी थी, तब उनका घर किसी किले में तब्दील हो गया था। सोनिया उस दिन घर पर ही थीं जब उन्हें पटाखों जैसी आवाज सुनाई दी थी। जब वह दौड़कर बगल के ऑफिस में गईं, तो इंदिरा गांधी का खून से लथपथ शरीर जमीन पर पड़ा था।

इस घटना के बाद उनके बच्चों राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को स्कूल से निकाल लिया गया और कमांडो उनके बेडरूम के बाहर तैनात कर दिए गए थे। अस्पताल तक की ड्राइव को याद करते हुए सोनिया ने बताया कि वह सफर बेहद असहनीय और लंबा लगा था।

हमेशा रहता था राजीव गांधी की हत्या का डर

सोनिया गांधी ने खुलासा किया कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उनके मन में लगातार यह डर बना रहता था कि अब अगला नंबर उनके पति राजीव गांधी का होगा। उन्होंने बताया कि भारतीय खुफिया एजेंसियों को राजीव गांधी के खिलाफ मौत की धमकियां मिली थीं, लेकिन नई सरकार ने कथित तौर पर उन्हें नजरअंदाज कर दिया और उनकी सुरक्षा हटा दी थी।

सोनिया का यह डर साल 1991 में उस समय सच साबित हुआ, जब श्रीलंकाई तमिल आतंकियों के आत्मघाती हमले में राजीव गांधी की भी हत्या कर दी गई। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि इस मामले का पूरा सच कभी सामने आ पाएगा। इंदिरा गांधी की मौत के बाद जब राजीव गांधी को प्रधानमंत्री बनने के लिए कहा गया था, तब सोनिया ने उनसे राजनीति से दूर रहने की गुहार लगाई थी।

कैसी थीं इंदिरा गांधी? घर और बाहर के दो रूप

सोनिया गांधी ने इंदिरा गांधी के व्यक्तित्व के अलग पहलुओं पर भी रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि बाहर से सख्त ‘आयरन लेडी’ दिखने वाली इंदिरा गांधी घर के भीतर बिल्कुल आम मां की तरह थीं। हालांकि, उनके गुस्से के किस्से भी कम नहीं थे। सोनिया ने अपनी किताब के हवाले से एक घटना का जिक्र किया जिसमें इंदिरा गांधी ने एक फैमिली डिनर में गुस्से में अपनी थाली टेबल के पार फेंक दी थी।

सोनिया के अनुसार, इंदिरा गांधी ने उन्हें एक बार बताया था कि जब वह पहली बार देश की प्रधानमंत्री बनी थीं, तब वह कितनी डरी हुई थीं।

इमरजेंसी और संजय गांधी की भूमिका पर बयान

वर्ष 1975 में देश में लगाई गई इमरजेंसी के फैसले पर सोनिया गांधी ने कहा कि उस समय परिवार बंटा हुआ था। राजीव गांधी इमरजेंसी के खिलाफ थे और उन्होंने अपनी मां से अगले चुनाव का इंतजार करने को कहा था, जबकि उनके छोटे भाई संजय गांधी इसके पूरी तरह पक्ष में थे।

सोनिया का मानना है कि यदि उस समय संजय गांधी को काबू में रखा जाता, तो देश को और कांग्रेस पार्टी को होने वाले कई नुकसान से बचाया जा सकता था। आज पीछे मुड़कर देखने पर सोनिया मानती हैं कि इमरजेंसी लगाना एक गलती थी और इंदिरा गांधी भी बाद में इस बात को महसूस करती थीं। उनका कहना था कि श्रीमती गांधी दिल से लोकतांत्रिक थीं और इमरजेंसी के दौरान वह कभी सहज नहीं थीं।

बाबरी विध्वंस और कांग्रेस की आत्मसंतुष्टि

दिसंबर 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने की घटना को याद करते हुए सोनिया गांधी ने बताया कि उन्होंने इसे टेलीविजन पर देखा था और वह रो पड़ी थीं। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें अहसास हुआ था कि महात्मा गांधी और नेहरू के बनाए धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र को बचाने के लिए एक लंबी लड़ाई लड़नी होगी।

इसके साथ ही सोनिया ने स्वीकार किया कि कांग्रेस पार्टी की आत्मसंतुष्टि और लापरवाह रवैये ने बीजेपी और उसकी कट्टर हिंदुत्व की राजनीति के उदय में मदद की थी।

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