नई दिल्ली/हैदराबाद: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ मार्च का नेतृत्व करेंगे। यह राजनीतिक कार्यक्रम मुख्य रूप से कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों द्वारा SIR (मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण) के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के जवाब में आयोजित किया जा रहा है। इस मार्च के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी (BJP) विपक्ष के आरोपों का करारा जवाब देने की तैयारी में है।
हैदराबाद में अमित शाह का मार्च और रूट
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह भव्य पदयात्रा दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक निकाली जाएगी। मार्च की शुरुआत निजाम कॉलेज के सामने स्थित बाबू जगजीवन राम की प्रतिमा से होगी। इसके बाद यह यात्रा आबिड्स से होते हुए मोज्जमजाही मार्केट पर समाप्त होगी।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार और तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंदर राव समेत कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल होंगे। इसके साथ ही, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बिहार के पटना और पश्चिम बंगाल के कोलकाता में भी इसी प्रकार के विरोध मार्च का नेतृत्व करेंगे।
भाजपा के इस राष्ट्रव्यापी अभियान की 4 मुख्य वजहें
भारतीय जनता पार्टी द्वारा इस देशव्यापी अभियान को चलाने के पीछे मुख्य रूप से चार बड़े कारण बताए जा रहे हैं:
- SIR का समर्थन: भाजपा का तर्क है कि विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर बेवजह सवाल उठा रहा है, जबकि इसका मुख्य उद्देश्य वोटर लिस्ट को पूरी तरह शुद्ध करना और सभी पात्र मतदाताओं के नाम उसमें शामिल करना है।
- वोट चोरी के आरोपों का जवाब: कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी दल चुनाव आयोग पर वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और वोट चोरी के गंभीर आरोप लगा रहे हैं। भाजपा इन तमाम आरोपों को भ्रामक बताकर सच्चाई जनता के सामने लाना चाहती है।
- चुनाव आयोग का बचाव: पार्टी का यह भी कहना है कि चुनाव आयोग जैसी निष्पक्ष और संवैधानिक संस्था पर बिना किसी ठोस आधार के आरोप लगाकर उसकी विश्वसनीयता को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।
- विपक्ष को घेरना: भाजपा लगातार यह आरोप लगा रही है कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल संवैधानिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर अपने राजनीतिक स्वार्थ के तहत दोहरे मापदंड अपना रहे हैं।
दिल्ली में विपक्ष की रैली के विरोध में प्रदर्शन
इससे पहले, INDIA ब्लॉक द्वारा रामलीला मैदान में आयोजित रैली के विरोध में भाजपा ने रविवार को दिल्ली समेत देश के विभिन्न हिस्सों में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ मार्च निकाला था। दिल्ली के हरि नगर से तिलक नगर तक लगभग एक किलोमीटर लंबा यह मार्च निकाला गया था। इस कार्यक्रम में 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ित परिवारों और सिख समुदाय के प्रमुख लोगों ने भी हिस्सा लिया था।
भाजपा ने यह भी आरोप लगाया है कि कांग्रेस ने रामलीला मैदान में SIR के खिलाफ रैली के लिए जानबूझकर 1 नवंबर का दिन चुना है, क्योंकि 1 नवंबर 1984 को ही देश में सिख विरोधी हिंसा की घटनाएं हुई थीं।
सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है मामला
उल्लेखनीय है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ा यह विवाद अब देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच चुका है। गत 12 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP), तृणमूल कांग्रेस (TMC), राष्ट्रीय जनता दल (RJD), वाम दलों और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने दिल्ली में बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक एक मार्च निकाला था। इसी दिन कुल 12 राजनीतिक दलों के 13 विपक्षी नेताओं ने SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आधिकारिक याचिका भी दाखिल की थी, जिस पर कानूनी प्रक्रिया जारी है।

