Delhi Police Protest: दिल्ली में पुलिसकर्मियों का प्रदर्शन, एसीपी और इंस्पेक्टर के तबादले पर विवाद

दिल्ली पुलिस के जवानों ने पूर्वी दिल्ली में एक एसीपी और एक इंस्पेक्टर का तबादला किए जाने के विरोध में राजधानी में एक अनोखा और बड़ा कदम उठाते हुए पुलिस हेडक्वॉर्टर का घेराव किया। प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों का कहना था कि यह कार्रवाई पूरी तरह से अनुचित है और इससे पुलिस बल का मनोबल गिरता है। इस घटनाक्रम ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि अनुशासनप्रिय माने जाने वाले पुलिस विभाग के कर्मी सड़कों पर उतरकर विरोध जताते नजर आए।

दिल्ली पुलिस हेडक्वॉर्टर के बाहर जवानों का प्रदर्शन

सोमवार सुबह दिल्ली पुलिस हेडक्वॉर्टर के गेट नंबर-1 के बाहर लगभग 80 पुलिसकर्मी इकट्ठा हुए और नारेबाजी शुरू कर दी। सुबह-सुबह अचानक हुए इस प्रदर्शन से पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों में हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कुछ ही देर में कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और जवानों को शांत कराने की कोशिश की।

प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मी जब नहीं माने, तो डीसीपी (नई दिल्ली) सचिन शर्मा मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों और एसीपी स्तर के अधिकारियों से कहा कि उन्हें इस तरह से प्रदर्शन नहीं करना चाहिए। डीसीपी ने उनसे आग्रह किया कि वे अपनी बात रखने के लिए पुलिस हेडक्वॉर्टर के अंदर चलें, लेकिन प्रदर्शनकारी इसके लिए तैयार नहीं हुए।

व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए जुटाए गए थे पुलिसकर्मी

मिली जानकारी के अनुसार, इस विरोध प्रदर्शन को संगठित करने के लिए दिल्ली पुलिस के विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुप में संदेश भेजे गए थे। इन मैसेज के जरिए पुलिसकर्मियों से सोमवार सुबह मुख्यालय के बाहर बड़ी संख्या में इकट्ठा होने की अपील की गई थी। इस पूरे प्रदर्शन का मुख्य मकसद तबादले का सामना करने वाले दोनों पुलिस अधिकारियों के प्रति अपना समर्थन जताना और उन्हें उनकी पुरानी पोस्टिंग पर वापस लाए जाने की मांग करना था।

स्थिति की नजाकत को भांपते हुए सभी जिलों के डीसीपी और यूनिट प्रमुखों को पहले ही निर्देश दिए गए थे कि वे अपने अधीन काम करने वाले कर्मचारियों को इस प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पुलिस मुख्यालय जाने से रोकें। इसके बावजूद काफी संख्या में पुलिसकर्मी वहां पहुंचने में कामयाब रहे।

वकीलों की मांग पर हुआ था दो पुलिस अधिकारियों का तबादला

पूरे विवाद की जड़ 23 अक्टूबर को शाहदरा पुलिस स्टेशन में हुई एक घटना से जुड़ी है। गांधी नगर सब-डिवीजन में तैनात एसीपी वशिष्ठ और शाहदरा पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर अरुण कुमार का तबादला कर दिया गया था। शाहदरा थाने में हुई इस घटना के दौरान एक वकील के सिर पर हाथापाई में गंभीर चोट लग गई थी।

इस घटना के बाद जिला अदालत के वकीलों में भारी आक्रोश फैल गया था और उन्होंने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी थी। वकीलों की मांग थी कि संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाए। वकीलों के दबाव और उनकी मांग पर ही प्रशासन ने इन दोनों पुलिस अधिकारियों के तबादले के आदेश जारी किए थे।

वकीलों ने वापस ली हड़ताल, लेकिन पुलिसकर्मियों में असंतोष

तबादले के आदेश जारी होने के ठीक बाद, 28 अक्टूबर को वकीलों ने अपनी हड़ताल वापस ले ली थी। हालांकि, वकीलों की मांग पर पुलिस अधिकारियों के किए गए इन तबादलों से दिल्ली पुलिस के निचले और मध्यम स्तर के कर्मियों में गहरा असंतोष फैल गया। प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों का मानना है कि ड्यूटी के दौरान इस तरह की कार्रवाई से जवानों का मनोबल कमजोर होता है। वे पुलिस कमिश्नर से मिलकर इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ की गई प्रशासनिक कार्रवाई पर अपनी चिंताएं साझा करना चाहते थे।

भोपाल में भी सामने आया वकील-पुलिस विवाद

इसी तरह की एक अन्य घटना में, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के जहांगीराबाद थाना क्षेत्र में भी अधिवक्ता राकेश रावल और पुलिसकर्मियों के बीच विवाद का मामला सामने आया है। इस मामले में दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई है। अधिवक्ता राकेश रावल की शिकायत पर थाना प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, जिससे वहां भी वकीलों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है।

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