दिल्ली प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई, पुलिस कार्रवाई और इंटरनेट बैन का मामला

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट आज यानी मंगलवार को दिल्ली में पिछले दिनों हुए प्रदर्शनों से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करने जा रहा है। यह पूरा मामला अक्टूबर महीने के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट में बदलाव के विरोध में हुए प्रदर्शनों से जुड़ा हुआ है। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच इन तमाम याचिकाओं पर विस्तार से सुनवाई करेगी।

प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई और मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप

दाखिल की गई याचिकाओं में दिल्ली पुलिस पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इनमें मुख्य रूप से पुलिस की ज्यादती, प्रदर्शनकारियों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लेना, और सार्वजनिक स्थलों पर लोगों की आवाजाही तथा शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर रोक लगाने के मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा, वकीलों और पत्रकारों के साथ मारपीट किए जाने, इंटरनेट सेवाएं बंद करने तथा पूर्ववर्ती अदालती आदेशों के उल्लंघन के आरोप भी लगाए गए हैं।

गौरतलब है कि 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए इन प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों ने 7 हजार से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था, जिसके बाद से ही यह मामला लगातार तूल पकड़े हुए है।

सुप्रीम कोर्ट के पिछले निर्देश और टिप्पणियां

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी कई अहम निर्देश जारी किए थे। कोर्ट ने 15 अक्टूबर को केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को आधिकारिक नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। साथ ही, घटनास्थल के CCTV फुटेज और अन्य सभी डिजिटल सबूतों को पूरी तरह सुरक्षित रखने के कड़े निर्देश दिए गए थे।

पूर्व की सुनवाइयों के मुख्य बिंदु

  • 9 अक्टूबर: सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने सरकार की सख्ती पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि प्रशासन को कुछ चीजों को रोकना ही होगा, लेकिन इसके लिए उतनी ही कार्रवाई करें जितनी जरूरी हो। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा था कि ‘मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल न करें।’
  • 11 अक्टूबर: सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट बाधित करने, मेट्रो सेवाएं रोकने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के मामलों पर कहा था कि मेट्रो सेवाएं और इंटरनेट सामान्य रूप से चलना चाहिए तथा लोगों की आवाजाही नहीं रोकी जानी चाहिए।
  • 15 अक्टूबर: CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि कोई भी व्यक्ति या पक्ष सुप्रीम कोर्ट को डरा-धमकाकर दबाव में नहीं ला सकता। कोर्ट ने यह भी कहा था कि उन्हें बाहर और अंदर की हर गतिविधि की पूरी जानकारी है।

आज की सुनवाई पर टिकी हैं निगाहें

मंगलवार को होने वाली इस सुनवाई में अदालत एक जैसे मुद्दों वाली याचिकाओं को अलग-अलग श्रेणियों में बांटने और संबंधित पक्षों द्वारा जवाब दाखिल करने की प्रक्रिया पर आगे विचार कर सकती है। इस मामले में पुलिस प्रशासन, केंद्र सरकार और याचिकाकर्ताओं के बीच की दलीलों पर देश भर की निगाहें टिकी हुई हैं।

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