देश में वायु प्रदूषण अब सिर्फ महानगरों और बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि गांवों की हवा भी उतनी ही जहरीली होती जा रही है। फिक्की की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश के कई हिस्सों में ग्रामीण इलाकों का प्रदूषण चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। फिक्की की रिपोर्ट के अनुसार, देश के 24 राज्यों में से 22 में शहरी इलाकों का प्रदूषण ग्रामीण क्षेत्रों से ज्यादा है, लेकिन कई क्षेत्रों में स्थिति इसके विपरीत भी देखने को मिल रही है।
मुंबई में समुद्री हवाओं का कवच कमजोर
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में इस बार समुद्री हवाओं का प्राकृतिक सुरक्षा कवच कमजोर पड़ गया है। 21 अक्टूबर को मुंबई का AQI (एयर क्वालिटी इंडेक्स) 165 दर्ज किया गया था, जबकि उस दिन दिल्ली का AQI 164 था। इसके साथ ही मुंबई दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में चौथे स्थान पर दर्ज की गई थी। इसके बाद 24 अक्टूबर को मुंबई का एयर क्वालिटी इंडेक्स बढ़कर 322 के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस साल मानसून की वापसी के बाद गुजरात और उत्तर महाराष्ट्र के ऊपर एक एंटी-साइक्लोन बना था। इसके कारण अक्टूबर के महीने में लगातार पूर्वी हवाएं चलती रहीं और समुद्र की ओर से आने वाली ठंडी हवाएं देर रात तक बहुत कमजोर रहीं।
समुद्री हवाएं क्यों नहीं कर पाई हवा साफ?
समुद्री हवाएं अपने साथ प्रदूषकों को दूर फैलाकर शहर के प्रदूषण को कम करने में मदद करती हैं। लेकिन एंटी-साइक्लोन के बनने के कारण समुद्री हवाओं की गति थम गई, जिससे पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म कणों का स्तर तेजी से बढ़ गया। समुद्री और स्थलीय हवाओं की गति का हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों के स्तर से सीधा संबंध होता है।
छोटे शहरों और पूर्वोत्तर में भी खराब हवा
सिर्फ महानगर ही नहीं, बल्कि देश के कई छोटे शहरों और पूर्वोत्तर राज्यों की हवा भी महानगरों से ज्यादा खराब हो चुकी है। मेघालय में असम सीमा के पास स्थित औद्योगिक क्षेत्र बर्नीहाट में AQI का स्तर 101.1 दर्ज किया गया, जबकि उस समय राजधानी दिल्ली में यह 99.6 ही रिकॉर्ड किया गया था। यह इस बात का प्रमाण है कि प्रदूषण अब देश के दूर-दराज के और छोटे औद्योगिक क्षेत्रों में भी पैर पसार चुका है।
एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) क्या है?
एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) एक ऐसा वैज्ञानिक टूल है, जिसकी मदद से यह मापा जाता है कि किसी स्थान पर हवा कितनी साफ या प्रदूषित है। इसके जरिए हवा में मौजूद हानिकारक एयर पॉल्यूटेंट्स से हमारी सेहत पर पड़ने वाले प्रभावों का अंदाजा लगाया जाता है।
AQI मुख्य रूप से 5 प्रमुख वायु प्रदूषकों के सांद्रता (कॉन्सन्ट्रेशन) को मापता है:
- ग्राउंड लेवल ओजोन
- पार्टिकल पॉल्यूशन (पीएम 2.5 और पीएम 10)
- कार्बन मोनोऑक्साइड
- सल्फर डाइऑक्साइड
- नाइट्रोजन डाइऑक्साइड
आम तौर पर मोबाइल ऐप या खबरों में AQI के आंकड़े जैसे 80, 102, 184 या 250 दिखाई देते हैं, जो हवा की गुणवत्ता की श्रेणी तय करते हैं कि वह अच्छी है, मध्यम है, खराब है या बेहद गंभीर स्थिति में पहुंच चुकी है।

