सुप्रीम कोर्ट का कड़ा आदेश: दिल्ली में बिक रहे पटाखे, सरकार से जांच की मांग

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली के बाजारों में पटाखों की खुली बिक्री और प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन की खबरों पर गहरी चिंता जताई है। अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को इस मामले की जांच करने का कड़ा निर्देश दिया है। यह पूरा मामला मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर सामने आया है, जिसमें अदालत के आदेश के बावजूद राष्ट्रीय राजधानी में पटाखों की अवैध बिक्री का दावा किया गया है।

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट का लिया गया संज्ञान

न्यायालय ने जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच के समक्ष इस विषय पर चर्चा की। बेंच ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि तमाम प्रतिबंधों के बावजूद दिल्ली के विभिन्न बाजारों में पटाखे खुलेआम बिक रहे हैं। कोर्ट ने सोमवार को ही दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में 4 से 6 नवंबर तक केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखे बेचने की अनुमति दी थी, साथ ही 7 और 8 नवंबर को सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक ही इन्हें फोड़ने का समय तय किया था।

बाजारों में खुलेआम बिक रहे पारंपरिक पटाखे

सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, चांदनी चौक, सदर बाजार, शास्त्री नगर, सरोजिनी नगर और न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी जैसे प्रमुख दिल्ली के बाजारों में पटाखे धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दुकानदार ग्रीन पटाखों की आड़ में पारंपरिक और प्रतिबंधित पटाखे बेच रहे हैं। इसके अलावा, कई पटाखों के पैकेटों पर क्यूआर कोड (QR Code) नहीं पाए गए या उनसे किसी भी प्रकार की प्रमाणन की जानकारी नहीं मिल रही थी।

सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेश और प्रदूषण नियंत्रण के प्रयास

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते खतरनाक वायु प्रदूषण के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट लगातार पटाखों की बिक्री और उनके इस्तेमाल पर सुनवाई कर रहा है। अदालत ने पहले ही यह माना था कि पिछले प्रतिबंधों के बावजूद पारंपरिक पटाखों की अवैध बिक्री और खरीद का सिलसिला रुका नहीं है। इसी कड़ी में कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद आगामी 9 नवंबर से पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध फिर से प्रभावी कर दिया जाएगा।

ग्रीन पटाखे क्या हैं?

पारंपरिक पटाखों के मुकाबले ग्रीन पटाखे पर्यावरण के अनुकूल माने जाते हैं। इन्हें इस तरह से तैयार किया जाता है कि जलने पर कम से कम धुआं और हानिकारक गैसें पैदा हों। इनमें हानिकारक केमिकल और रसायनों का इस्तेमाल बहुत सीमित मात्रा में किया जाता है, ताकि वायु गुणवत्ता पर इसका कम से कम बुरा असर पड़े।

पूर्व की सुनवाइयों में कोर्ट के निर्देश और सुझाव

इससे पहले पिछली सुनवाइयों के दौरान भी सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां की थीं।

  • 30 सितंबर की सुनवाई: कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि वह पटाखों पर पूरी तरह रोक लगाने के पक्ष में तो नहीं है, लेकिन चौबीसों घंटे पटाखे चलाने की अनुमति भी नहीं दी जा सकती। बेंच ने कहा था कि एक संतुलित रास्ता निकालना बेहद जरूरी है।
  • 29 अक्टूबर का सुझाव: अदालत ने सुझाव दिया था कि लोगों को जागरूक करने के लिए विराट कोहली जैसी मशहूर हस्तियों की मदद ली जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि लोकप्रिय चेहरों के जरिए ऐसे संदेश जारी किए जाने चाहिए जो बिना प्रदूषण बढ़ाए त्योहार मनाने की अपील करते हों।

बढ़ते प्रदूषण और कोर्ट के सख्त रुख के बीच अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इन आदेशों और नियमों का जमीनी स्तर पर कितनी सख्ती से पालन करवा पाता है।

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