2027 के यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ‘फ्री हैंड’ दे दिया है। अब चुनाव में उम्मीदवार चुनने से लेकर पूरी रणनीति बनाने तक की कमान सीधे सीएम योगी के हाथों में होगी। दिल्ली से लेकर लखनऊ के राजनीतिक गलियारों में इस फैसले की चर्चा जोरों पर है। सीएम योगी ने इस दिशा में अपने चुनावी अभियान का आगाज भी कर दिया है। लोकसभा चुनाव के नतीजों से केंद्रीय नेतृत्व ने लिया सबक 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सीएम योगी ने दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व को एक लिस्ट सौंपी थी। इसमें करीब दो दर्जन से ज्यादा सांसदों के टिकट काटकर नए चेहरों को मौका देने की सलाह दी गई थी। लेकिन आलाकमान ने इस सिफारिश को दरकिनार कर 64 में से 47 सांसदों को दोबारा मैदान में उतार दिया। नतीजा यह रहा कि 47 में से 26 सांसद चुनाव हार गए। बीजेपी नीत गठबंधन यूपी में महज 36 सीटों पर सिमट गया, जिसकी वजह से केंद्र में पार्टी को अपने दम पर पूर्ण बहुमत नहीं मिला। RSS और पार्टी के एक बड़े धड़े ने इस पर गंभीर सवाल उठाए थे। अब उसी गलती से सबक लेते हुए हाईकमान ने विधानसभा चुनाव की पूरी जिम्मेदारी योगी के कंधों पर डाल दी है। यूपी में 2024 के लोकसभा चुनाव में किस पार्टी को कितने सीटें मिलीं- MLC चुनाव से दिखेगा योगी का ‘फॉर्मूला’ विधान परिषद की शिक्षक-स्नातक क्षेत्र की 11 सीटों के चुनाव की कमान भी सीएम योगी ही संभाल रहे हैं। इनमें से जिन 6 सीटों पर प्रत्याशी घोषित होने हैं, वहां उम्मीदवार तय करने के लिए सीएम ने कड़ा मानदंड रखा है। उन्होंने साफ कर दिया है कि ‘जिस दावेदार ने जितने ज्यादा वोटर बनवाए हैं, टिकट उसी का हकदार होगा।’ विशेषकर वाराणसी खंड (स्नातक व शिक्षक) और प्रयागराज-झांसी सीट पर सीएम की खास नजर है, जो फिलहाल सपा के पास हैं। पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में आने वाली इन सीटों को सीएम हर हाल में सपा से वापस छीनना चाहते हैं। अब ‘दिल्ली’ नहीं, ‘लखनऊ’ से तय होंगे नाम 2017 के बाद से चाहे 2019 और 2024 का लोकसभा चुनाव हो, 2022 का विधानसभा चुनाव हो या फिर राज्यसभा और मेयर चुनाव, फैसले हमेशा दिल्ली से ही होते थे। लेकिन इस बार तस्वीर अलग है। किसकी होगी मुख्य भूमिका : प्रत्याशी चयन में सीएम योगी, संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह, और RSS के क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार व महेंद्र कुमार की भूमिका सबसे अहम रहेगी। कोर कमेटी से राय-मशविरा : सीएम योगी डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के साथ मिलकर नाम तय करेंगे। सहयोगी दलों पर फैसला केंद्र करेगा : अपना दल (एस), आरएलडी, निषाद पार्टी और सुभासपा जैसी सहयोगी पार्टियों के साथ सीटों के तालमेल पर अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व ही लेगा। बगावत रोकने का ‘प्लान-बी’: टिकट काटने की जगह बदलेंगे सीटें बीजेपी के शुरुआती आंतरिक सर्वे में पार्टी को 190 से 205 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। हालिया राजनीतिक माहौल को देखते हुए पार्टी को डर है कि अगर ज्यादा विधायकों के टिकट एकमुश्त काटे गए, तो वे सपा, कांग्रेस या बसपा में शामिल होकर बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं। इस बगावत को रोकने के लिए बीजेपी ने ‘सीट बदलने’ की रणनीति बनाई है। जिन विधायकों के खिलाफ माहौल है, लेकिन उनका सियासी नुकसान ज्यादा हो सकता है, उन्हें दूसरी सुरक्षित सीटों पर भेजा जाएगा। वहीं, कमजोर और गैर-प्रभावशाली विधायकों के टिकट काटे जाएंगे। —————– ये भी पढ़ें- ‘अखिलेश कभी यूपी के मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे’:केशव बोले- विधायकों के टिकट कटेंगे, लेकिन ये प्रदेश भाजपा तय नहीं करेगी यूपी चुनाव से पहले उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा- ‘अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे। 5 साल बहुमत की सरकार थी। तब उन्होंने पिछड़ों-दलितों के लिए क्या किया? सपा का PDA फर्जी है। सपा-कांग्रेस तो जेन-जी विरोधी पार्टियां हैं। पढ़िए केशव प्रसाद मौर्य का पूरा इंटरव्यू…




