खड़गे के आवास पर जुटी विपक्ष की ‘मॉक संसद’
देश की राजनीति में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष का आक्रामक रुख एक बार फिर से सुर्खियों में है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के दिल्ली स्थित आवास पर ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन सहित तमाम प्रमुख विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं ने एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक को ‘मॉक संसद’ का रूप दिया गया, जहाँ मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की कार्यप्रणाली और वोटर लिस्ट संशोधन प्रक्रिया पर तीखे हमले बोले गए।
एसआईआर (SIR) प्रक्रिया और वोटर लिस्ट से कटे नाम: मुख्य आरोप
विपक्षी नेताओं का दावा है कि चुनाव आयोग द्वारा चलाई जा रही एसआईआर (Special Summary Revision / विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण) प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली और प्रक्रियात्मक गड़बड़ियां हुई हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया की आड़ में देश भर के लगभग 13 करोड़ वैध मतदाताओं के नाम वोटर सूची से हटा दिए गए हैं, जो कि लोकतंत्र के लिए एक बेहद चिंताजनक स्थिति है।
विपक्ष द्वारा लगाए गए मुख्य आरोप:
- 13 करोड़ वोटरों के नाम हटना: विपक्षी दलों का सबसे बड़ा आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया के नाम पर बिना उचित भौतिक सत्यापन के लगभग 13 करोड़ नागरिकों के मताधिकार छीन लिए गए हैं।
- पारदर्शिता का अभाव: चुनाव आयोग पर आरोप लगाया गया कि वोटर संशोधन प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है और राजनीतिक दलों को समय पर पूरी जानकारी नहीं दी जा रही है।
- विपक्ष समर्थित क्षेत्रों पर असर: विपक्षी नेताओं ने अंदेशा जताया कि चुनिंदा क्षेत्रों और खास वर्ग के मतदाताओं को निशाना बनाकर उनके नाम लिस्ट से गायब किए जा रहे हैं।
- शिकायतों की अनदेखी: विपक्ष का कहना है कि जब इस गड़बड़ी को लेकर चुनाव आयोग के समक्ष शिकायतें दर्ज कराई गईं, तो उन पर कोई ठोस या संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई।
- तकनीकी और प्रशासनिक खामियाँ: एसआईआर प्रक्रिया को लागू करने में तकनीकी स्तर पर व्यापक गड़बड़ियों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया।
- संवैधानिक मर्यादा और निष्पक्षता पर सवाल: विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अपनी स्वतंत्र और निष्पक्ष भूमिका निभाने में विफल साबित हो रहा है।
लोकतंत्र और चुनावों की निष्पक्षता पर बहस
‘मॉक संसद’ के माध्यम से विपक्षी दलों ने एकजुटता दिखाने के साथ-साथ यह संदेश देने का प्रयास किया है कि देश में निष्पक्ष चुनाव कराने वाली संस्थाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं। नेताओं का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से बाहर होना केवल एक प्रशासनिक भूल नहीं हो सकती, बल्कि इसके पीछे गहरा राजनीतिक कारण भी हो सकता है।
आगामी रणनीति
विपक्षी दलों ने साफ किया है कि वे इस मुद्दे को केवल खड़गे के आवास तक सीमित नहीं रखेंगे। इस मुद्दे को आगामी संसद सत्र में उठाने के साथ-साथ सड़क से लेकर अदालत तक ले जाने की रणनीति बनाई जा रही है। विपक्ष बहुत जल्द चुनाव आयोग के समक्ष एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल भेजने और अपनी माँगें रखने की तैयारी में है।

