कोडीन कफ सिरप केस में शिकंजा और कसा, डिपो से रिकॉर्ड नहीं मिले, तीन और फर्म जांच के रडार पर

कोडीनयुक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार को लेकर ड्रग कंट्रोल विभाग की जांच तेज हो गई है। ताजा कार्रवाई में सामने आया है कि तीन और फर्में विभाग के रडार पर हैं, जिनके द्वारा जिन कंपनियों के डिपो से सिरप मंगाई गई, उनके खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड अब तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। विभाग ने इन डिपो से पिछले तीन साल का पूरा रिकॉर्ड मांगा है।

ड्रग कंट्रोल विभाग के सूत्रों के मुताबिक, जिले में इस समय कुल 13 फर्में कोडीनयुक्त सिरप की सप्लाई करती हैं। हाल ही में विभाग ने कंपनियों के डिपो से सभी फर्मों के रिकॉर्ड तलब किए थे। इनमें से 10 फर्मों के रिकॉर्ड मिल गए हैं, जबकि तीन फर्मों के दस्तावेज अब तक नहीं आए हैं। जिन 10 फर्मों का रिकॉर्ड मिला, उनमें से एक फर्म के स्टॉक में गंभीर गड़बड़ी पाई गई है।

भालोटिया मार्केट में छापा, स्टॉक और बिल का नहीं हुआ मिलान

रिकॉर्ड में गड़बड़ी सामने आने के बाद विभाग की टीम ने भालोटिया मार्केट में छापा मारा। यहां स्थित एनए फार्मा में कोडीनयुक्त कफ सिरप और अन्य नशीली दवाओं के स्टॉक की जांच की गई। जांच में स्टॉक और बिल का मिलान नहीं हो सका, जिससे मामला और संदिग्ध हो गया।

जांच में सामने आया कि चालू वर्ष में एनए फार्मा से करीब 8,000 बोतल कफ सिरप और लगभग 8,000 ट्रामाडोल टैबलेट बेची गईं। इनमें से करीब 800 बोतल कोडीनयुक्त कफ सिरप कुशीनगर की एनके फार्मा को भेजी गई, लेकिन बाकी सिरप का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिला।

ड्रग कंट्रोल विभाग ने फर्म संचालक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा, लेकिन वह संतोषजनक explanation नहीं दे सके। इसके बाद विभाग की ओर से कैंट थाने में साक्ष्यों के साथ तहरीर दी गई है।

नशे के धंधेबाजों तक पहुंचने की आशंका

विभाग को आशंका है कि कफ सिरप को महंगे दामों पर नशे के धंधेबाजों को बेचा गया है। वहीं, जिन तीन फर्मों के रिकॉर्ड अभी तक डिपो से नहीं मिले हैं, उनके स्टॉक की जांच भी नहीं हो सकी है। सूत्रों का कहना है कि इन फर्मों में भी गड़बड़ी की पूरी संभावना है

दस साल तक सिरप बेची, अब कारोबार बंद

सूत्रों के अनुसार, भालोटिया मार्केट में ऐसी आठ फर्में भी हैं, जिन्होंने करीब दस साल तक कोडीनयुक्त कफ सिरप का कारोबार किया, लेकिन अब वे सिर्फ अन्य दवाएं बेच रही हैं। हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय तक इनके स्टॉक की कभी गहन जांच नहीं की गई

पुराने मामलों से भी जुड़ रहा है कनेक्शन

ड्रग कंट्रोल विभाग ने अगस्त 2022 में गुप्ता बंधुओं से जुड़ी थोक दुकानों पर कार्रवाई की थी। उस समय जांच में सामने आया था कि ब्लीचिंग पाउडर के बिल पर नशीली दवाएं मंगाकर अवैध रूप से बेची गईं। उस कार्रवाई के बाद पांच दुकानों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए थे। हालांकि, इसके बाद अन्य दुकानों की नियमित जांच नहीं हो सकी।

अधिकारियों के बयान

सहायक आयुक्त, औषधि विभाग पूरनचंद ने कहा,

“तीन फर्मों की खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड अभी कंपनियों के डिपो से नहीं मिले हैं। एक फर्म के स्टॉक में गड़बड़ी पाई गई है, जिस पर तहरीर दी गई है। जांच जारी है, जहां भी गड़बड़ी मिलेगी, सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने कहा,

“दवा कारोबार से जुड़ी एक फर्म के खिलाफ तहरीर प्राप्त हुई है। स्टॉक में गड़बड़ी के साक्ष्य सामने आए हैं। मामले की जांच की जा रही है और जल्द ही आगे की कार्रवाई होगी।”

कुल मिलाकर, कोडीनयुक्त कफ सिरप की जांच अब नई फर्मों और पुराने नेटवर्क की ओर बढ़ रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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