कन्नौज, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में करीब 15 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के सोने की बरामदगी ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। मामले ने तब नया मोड़ ले लिया जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि बरामदगी की वास्तविक मात्रा को छिपाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कार से 26 किलो सोना मिला था, लेकिन पुलिस ने केवल 10 किलो सोना बरामद दिखाया।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “दस दिखाया, सोलह गटकाया, भाजपा की पुलिस की माया।” उनके इस बयान के बाद मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। विपक्ष जहां पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है, वहीं प्रशासन जांच की निष्पक्षता का दावा कर रहा है।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, शुक्रवार देर रात सकरावा थाना क्षेत्र में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर एक सड़क दुर्घटना के बाद यह मामला सामने आया। पुलिस टीम कांवड़ ड्यूटी से लौट रही थी, तभी निकवा गांव के पास उनकी टाटा सूमो की एक ब्रेजा कार से टक्कर हो गई। दुर्घटना के बाद पुलिस ने कार सवार दो युवकों से पूछताछ की।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोनों युवक पूछताछ के दौरान घबराए हुए दिखाई दिए, जिससे संदेह उत्पन्न हुआ। इसके बाद वाहन की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान एक काले रंग के बैग से सोने की 10 ईंटें बरामद हुईं। तालग्राम थाने में वजन कराने पर इनका कुल वजन 10 किलो 26 ग्राम पाया गया।
बरामद सोने की अनुमानित बाजार कीमत करीब 15 करोड़ 39 लाख रुपये बताई जा रही है। यह बरामदगी हाल के वर्षों में प्रदेश में हुई बड़ी सोना बरामदगी की घटनाओं में से एक मानी जा रही है।
दो आरोपी हिरासत में
पुलिस ने मौके से दो युवकों को हिरासत में लिया। उनकी पहचान सरोज पंत (33 वर्ष), निवासी पालपा, नेपाल और संदीप जायसवाल (28 वर्ष), निवासी महराजगंज के रूप में हुई है।
प्रारंभिक पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि वे सोने की खेप को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का काम करते थे। हालांकि, उन्होंने यह दावा किया कि उन्हें सोने के वास्तविक स्रोत और अंतिम खरीदार की जानकारी नहीं होती थी।
गोरखपुर से दिल्ली तक पहुंचती थी सोने की खेप
जीएसटी विभाग और पुलिस की संयुक्त पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्हें गोरखपुर के एक होटल में सोने की खेप सौंपी जाती थी। इसके बाद वे इसे दिल्ली पहुंचाते थे। दिल्ली पहुंचने के बाद एक अज्ञात व्यक्ति फोन के माध्यम से संपर्क करता था और खेप अपने कब्जे में ले लेता था।
आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने 17 अगस्त को लगभग 3 किलो सोना दिल्ली पहुंचाया था। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं और यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि सोना किसके निर्देश पर भेजा जा रहा था।
नेपाल कनेक्शन की जांच
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने नेपाल से भारत में सोना लाने के संभावित रास्तों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, नेपाल से सीमावर्ती क्षेत्रों तक सोना साइकिल और पैदल मार्गों के जरिए पहुंचाया जाता था। इसके बाद इसे गोरखपुर लाकर दिल्ली और अन्य शहरों में भेजा जाता था।
हालांकि, पुलिस और कस्टम विभाग ने अभी तक इस रूट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बरामद सोना तस्करी का हिस्सा था या इसके पीछे कोई अन्य नेटवर्क सक्रिय था।
अखिलेश यादव ने उठाए सवाल
सोने की बरामदगी के बाद अखिलेश यादव ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका दावा है कि पुलिस को कार से कुल 26 सोने की ईंटें मिली थीं, लेकिन सार्वजनिक रूप से केवल 10 ईंटें दिखाई गईं।
सपा प्रमुख के इस आरोप के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। समाजवादी पार्टी के नेताओं ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो यह बेहद गंभीर मामला है और इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
वहीं भाजपा और पुलिस प्रशासन ने अभी तक अखिलेश यादव के दावे पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच एजेंसियां पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कस्टम विभाग को सौंपी गई जांच
पुलिस ने बरामद सोना और दोनों आरोपियों को कस्टम विभाग के हवाले कर दिया है। अब कस्टम विभाग सोने के स्रोत, तस्करी के संभावित नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच करेगा।
इसके साथ ही आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड और पिछले यात्रा विवरण की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि इससे पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
राजनीतिक और कानूनी नजरें जांच पर
कन्नौज में हुई इस बड़ी बरामदगी ने कानून व्यवस्था, सीमा पार तस्करी और पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जांच एजेंसियां सोने के स्रोत और तस्करी के नेटवर्क की तलाश में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इस मामले को लेकर सरकार और पुलिस को घेरने की कोशिश कर रहा है।
अब सभी की नजरें कस्टम विभाग और अन्य जांच एजेंसियों की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि बरामद सोना कहां से आया, इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं और अखिलेश यादव द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

