अमृत योजना के तहत सुल्तानपुर शहर में बेहतर जलापूर्ति के दावों की हकीकत अब सामने आने लगी है। जल निगम द्वारा बिछाई गई नई वाटर सप्लाई पाइपलाइनों में जगह-जगह लीकेज की शिकायतें मिल रही हैं, जिससे शहर के कई इलाकों में नियमित जलापूर्ति बाधित हो रही है। सबसे गंभीर बात यह है कि पाइपलाइन बिछाने के बाद आवश्यक तकनीकी परीक्षण (टेस्टिंग) पूरा किए बिना ही जलापूर्ति शुरू कर दी गई, जिसके कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई।
करीब दो लाख से अधिक आबादी वाले सुल्तानपुर शहर को 25 वार्डों में बांटकर जलापूर्ति को सुचारू करने के उद्देश्य से अमृत योजना के अंतर्गत नई पाइपलाइनों का विस्तार किया गया था। योजना के अनुसार शहर को पांच जोन में विभाजित किया गया और सभी क्षेत्रों में नई लाइनें डाली गईं। हालांकि, जल निगम की ओर से पाइपलाइन की प्रेशर टेस्टिंग और लीकेज जांच का कार्य समय पर नहीं किया गया।
ओवरहेड टैंक से जैसे ही पानी की आपूर्ति शुरू हुई, वैसे ही कई इलाकों में नई पाइपलाइनों से पानी रिसने लगा। इससे न केवल जलापूर्ति प्रभावित हुई, बल्कि सड़कों और गलियों में पानी भरने की समस्या भी सामने आई। लीकेज के कारण पर्याप्त दबाव से पानी नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे लोगों को समय पर पानी नहीं मिल रहा।
स्थिति को संभालने के लिए नगर पालिका को आगे आना पड़ा है। नगर पालिका प्रशासन ने लीकेज सुधार के लिए अलग से टीम गठित की है और लगातार मरम्मत का कार्य कराया जा रहा है। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी लाल चंद्र सरोज ने बताया कि जोन टू-ए और जोन थ्री में पाइपलाइन की लीकेज को ठीक कर लिया गया है, जबकि अन्य क्षेत्रों में भी सुधार कार्य तेजी से चल रहा है।
हालांकि, सवाल यह उठ रहा है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद यदि पाइपलाइन बिछाने के बाद बुनियादी परीक्षण तक नहीं किए गए, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है। अमृत योजना से शहरवासियों को राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन फिलहाल यह योजना नगर प्रशासन के लिए अतिरिक्त सिरदर्द बनती नजर आ रही है।




