सपा के कद्दावर नेता आजम खान को अर्श से फर्श पर लाने वाले IAS आन्जनेय सिंह की यूपी में प्रतिनियुक्ति की अवधि पूरी हो चुकी है। वे मुरादाबाद मंडल कमिश्नर का चार्ज मुरादाबाद DM को सौंपकर छुट्टी पर चले गए हैं। मूल कैडर सिक्किम से यूपी आने के बाद 7 बार यह अवधि बढ़ाई जा चुकी है। तो क्या आन्जनेय की प्रतिनियुक्ति अवधि फिर से बढ़ाई जाएगी? इसके पीछे वजह क्या होगी? पढ़िए यूपी एक्सप्लेनर में… सवाल-1: क्या आन्जनेय सिंह की प्रतिनियुक्ति 8वीं बार बढ़ाई जा सकती है? अगर हां तो क्या वजह हो सकती है? जवाब: इसे लेकर साफ तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। हालांकि सूत्रों के मुताबिक, आन्जनेय को प्रतिनियुक्ति यानी सेवा विस्तार मिल सकता है। यूपी सरकार ने इसका प्रस्ताव केंद्र को भेज दिया है। इसकी 6 मुख्य राजनीतिक और प्रशासनिक वजहें हैं… राजनीतिक वजहें i) वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र कुमार बताते हैं- रामपुर के DM रहते हुए आन्जनेय सिंह ने सपा नेता आजम खान और उनके परिवार के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की। जौहर यूनिवर्सिटी से लेकर आजम पर दर्जनों मुकदमों की पैरवी तक, उन्होंने सरकार के एजेंडे को जमीन पर उतारा। रामपुर और मुरादाबाद जैसे सपा के गढ़ में भाजपा को राजनीतिक बढ़त दिलाने में उनकी भूमिका बेहद अहम है। ii) वरिष्ठ पत्रकार रतनमणि लाल के मुताबिक- सरकार आन्जनेय सिंह की कार्यशैली और प्रशासनिक पकड़ से बेहद प्रभावित है। राजनीतिक और सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील माने जाने वाले मुरादाबाद मंडल (पश्चिमी यूपी) को मैनेज करने के लिए चुनावी साल में भाजपा सरकार किसी नए या अपरिचित अधिकारी पर जोखिम नहीं लेना चाहती। iii) पश्चिमी यूपी में राजनीतिक समीकरणों को साधने और कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर किसी भी प्रकार की ढील न होने देने के लिए सरकार को एक ऐसे अनुभवी प्रशासनिक चेहरे की जरूरत है, जो क्षेत्र के चप्पे-चप्पे से वाकिफ हो। प्रशासनिक वजहें i) आन्जनेय सिंह मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर के रूप में लंबा कार्यकाल (साढ़े 5 साल) पूरा कर चुके हैं। क्षेत्र की कानून-व्यवस्था, सांप्रदायिक संवेदनशीलता और भौगोलिक स्थिति की उन्हें जितनी गहरी समझ है, उतनी नए अधिकारी को नहीं होगी। ii) आजम खान और उनके करीबियों से जुड़े कई मुकदमे और जमीनों की कुर्की/रिकवरी की कानूनी प्रक्रिया अदालतों के आखिरी चरण में हैं। राज्य सरकार का मानना है कि इस महत्वपूर्ण मोड़ पर अधिकारी बदलने से मामलों की पैरवी कमजोर पड़ सकती है। iii) आन्जनेय सिंह को यूपी में रखने पर सिक्किम सरकार को अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) देने में कोई परेशानी नहीं रही है। ऐसे में केंद्र सरकार के लिए उनका कार्यकाल बढ़ाना आसान हो जाता है। सवाल-2: क्या किसी वजह से प्रतिनियुक्ति बढ़ाने का प्रस्ताव नामंजूर भी हो सकता है? जवाब: हां, ऐसा हो सकता है। दरअसल, केंद्र सरकार ने ‘ऑल इंडिया सर्विस मैनुअल’ के दो नियमों को ढीला करके आन्जनेय को यूपी भेजा था। पहला नियम- ऑल इंडिया सर्विस (IAS/IPS) के अधिकारी को प्रतिनियुक्ति पर गृह राज्य नहीं भेजा जा सकता। जबकि आन्जनेय मूल रूप से यूपी के मऊ जिले के रहने वाले हैं। दूसरा नियम- किसी भी IAS के लिए उसके कैडर से बाहर दूसरे राज्य में प्रतिनियुक्ति की अधिकतम सीमा विशेष परिस्थितियों में भी 7 साल से ज्यादा नहीं हो सकती। आन्जनेय यूपी में 11 साल बिता चुके हैं। सवाल-3: क्या अवधि बढ़ाने के बजाय केंद्र सरकार उन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भी बुला सकती है? जवाब: सामान्य नियमों के तहत ऐसा नहीं किया जा सकता। सवाल-4: आन्जनेय सिंह को गृह राज्य में प्रतिनियुक्ति कैसे मिल गई? जवाब: अखिल भारतीय सेवा के किसी अधिकारी को गृह राज्य में प्रतिनियुक्ति पर भेजने के दो नियम हैं- पहला- विवाह… अगर अधिकारी की शादी किसी दूसरे कैडर के अधिकारी से हुई हो। दूसरा- बेहद निजी/पारिवारिक कठिनाई… इसके तहत माता-पिता या परिवार के सदस्यों की गंभीर बीमारी, वृद्धावस्था में देखभाल या जान का खतरा शामिल होता है। ————————————————– ये एक्सप्लेनर भी पढ़ें… जौहर यूनिवर्सिटी टूटने से भाजपा को क्या मिलेगा: 38 इमारतें अवैध तो सपा विरोध क्यों कर रही जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर भाजपा और सपा के बीच राजनीति जारी है। भाजपा इसे ‘भूमाफिया’ पर कार्रवाई बता रही है। वहीं, सपा, भाजपा को ‘यूनिवर्सिटी तोड़ने वाला आक्रांता’ कह रही है। लेकिन इमारतें अवैध हैं तो सपा कार्रवाई का विरोध क्यों कर रही है? क्या सभी 38 इमारतें ढहा दी जाएंगी? पढ़िए यूपी एक्सप्लेनर में…




