यूपी भाजपा उपाध्यक्ष पूजा पाल ने माफिया अतीक अहमद के बेटों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा- जिनके खून में बदमाशी हो, यातनाएं देने वाले हों, जमीन हड़पने वाले हों, कत्ल-ए-आम करने वाले हों, उनकी सोच कभी नहीं बदल सकती। अतीक को बदलना होता, तो बदल चुका होता। अपने बच्चों में अच्छे संस्कार देकर जाता। मैं कहती हूं कि वो चाहे जेल में रहें या जेल से बाहर आएं, उनकी सोच कभी नहीं बदल सकती। दरअसल, विधायक पल्लवी पटेल समेत कई नेता अबान की मौत पर दुख जताने अतीक परिवार के पास गए थे। इसी को लेकर पूजा पाल ने नाराजगी जताई। अब पढ़िए पूजा पाल ने क्या कहा पूजा पाल ने कहा- यह मानना मुश्किल है कि जेल जाने या कठिन परिस्थितियों से गुजरने के बाद ऐसे लोग सुधर जाएंगे। जिनकी सोच में ही अपराध और दूसरों को पीड़ा पहुंचाना शामिल हो, वे कभी नहीं बदल सकते। कुछ लोग मानते हैं कि जेल में रहने या जीवन की बड़ी घटनाओं के बाद इंसान बदल जाता है, लेकिन मैं इससे सहमत नहीं हूं। जिनके खून में ही बदमाशी हो, जिनकी सोच लोगों को दुख देने, जमीन हड़पने, कत्लेआम करने और शोषण करने की हो, वे चाहे जेल में रहें या बाहर, उनकी मानसिकता नहीं बदल सकती। अतीक के परिवारवाले कभी नहीं सुधर सकते पूजा पाल ने आगे कहा कि अतीक अहमद का परिवार पहले से ही कई मुश्किलों और बिखराव का सामना कर रहा है। इसके बावजूद उनके व्यवहार और सोच में कोई बदलाव दिखाई नहीं देता। यह अतीक अहमद के परिवार के लोग हैं, कभी नहीं सुधर सकते। पूजा पाल ने कहा कि दुख की घड़ी में लोगों को सादगी और संयम दिखाना चाहिए, लेकिन परिवार के लोगों के व्यवहार से ऐसा नहीं लगता कि उन्होंने कोई सबक लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी सोच आज भी वही है, जो पहले थी। इनकी सोच हमेशा से बदमाशी और माफिया प्रवृत्ति वाली रही है। चाहे पिता हों या पुत्र, उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। यही वजह है कि उनकी कार्यशैली और रवैये में कोई बदलाव नजर नहीं आता। अब पूजा पाल के बारे में जानिए पूजा पाल स्वर्गीय विधायक राजू पाल की पत्नी हैं। राजू पाल इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट से विधायक थे। सपा से निकाली गईं विधायक पूजा पाल को भाजपा ने पिछले दिनों प्रदेश उपाध्यक्ष बना दिया। यूपी की राजनीति में पूजा पाल की कहानी त्रासदी और संघर्ष भरी रही है। वह शादी के 9 दिन बाद ही विधवा हो गई थीं। न चाहते हुए भी राजनीति में आना पड़ा। पति के हत्यारे के खिलाफ पहला चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं। फिर भी पूजा ने हिम्मत दिखाई, लड़ाई लड़ी। अगले चुनाव में जीत हासिल की। प्रयागराज के सबसे ताकतवर व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा लड़ा। इन सबके बीच उनके राजनीतिक जीवन में कई बदलाव आए। पूजा ने पार्टी बदल ली। सपा से विधायक बनीं। 15 अप्रैल, 2023 की रात करीब 10:30 बजे अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या हो गई। उस दिन के बाद पूजा का मन बदल गया। उन्होंने सपा से किनारा कर लिया और भाजपा के साथ खड़ी नजर आईं। 14 अगस्त, 2025 को अखिलेश यादव ने पूजा पाल को सपा से बाहर भी कर दिया था। इसके बाद वे भाजपा में आ गईं। पढ़िए, अतीक के बेटे अबान की मौत कैसे हुई अबान गुरुवार (6 अगस्त) सुबह प्रयागराज से झांसी जा रहा था। क्रेटा कार में उसके 4 और दोस्त थे। अबान कार की आगे वाली सीट पर बैठा था। कार उसका साथी जैद चला रहा था, जबकि अबान के पीछे सोनू बैठा था। 120 किमी की रफ्तार से चल रही कार उसी तरफ डिवाइडर से टकराई, जिस तरफ अबान बैठा था। यही वजह रही कि उसे सबसे ज्यादा चोटें आईं। टक्कर के कुछ देर बाद अबान और सोनू की मौके पर ही मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, तेज टक्कर से अबान के लीवर, लंग्स और शरीर की तिल्ली (Spleen) फट गई। पसलियां भी टूट गई थीं। शरीर के अंदर ज्यादा ब्लीडिंग होने से उसकी मौत हुई। कार में अबान की सीट के पीछे बैठे उसके साथी सोनू की मौत सिर की हड्डी टूटने से हुई थी। पिता अतीक की कब्र के बगल में दफनाया गया था 8 अगस्त को अबान को प्रयागराज में पिता अतीक की कब्र के बगल में दफनाया गया था। तीनों भाइयों अली, उमर और अहजम ने अबान को कंधा दिया था। मां शाइस्ता परवीन बेटे के जनाजे में शामिल नहीं हुई थी। वह पति अतीक और बेटे असद के जनाजे में भी नहीं पहुंची थी। शाइस्ता 2023 से फरार है। भाई के जनाजे में शामिल होने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट से अली-उमर को 4 साल बाद पैरोल मिली थी। इसके बाद पुलिस झांसी से अली और लखनऊ से उमर को लेकर आई थी। दोनों का चेहरा न दिखे, इसलिए वैन पर पर्दे डाल दिए गए थे। ——————— ये खबर भी पढ़िए- अतीक के करीबियों ने टोल गेट तोड़ा, दबंगई का CCTV:प्रयागराज में उमर के काफिले की गाड़ियों ने पुलिसवालों को कुचलना चाहा, रील बनाई माफिया अतीक अहमद के बड़े बेटे उमर से जुड़ा एक और विवाद सुर्खियों में है। उमर के करीबियों ने टोल प्लाजा पर दबंगई और गुंडई दिखाई, जिसका CCTV सामने आया है। असल में अतीक के छोटे बेटे अबान की मौत के बाद सुपुर्द-ए-खाक में शामिल होने के लिए लखनऊ जेल से उमर को प्रयागराज लाया जा रहा था। पूरी खबर पढ़िए




