उत्तर प्रदेश की रामनगरी अयोध्या बीते एक दशक में धार्मिक पर्यटन का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरी है। खास तौर पर राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्डतोड़ इजाफा देखा गया है। हालात यह हैं कि 2015 की तुलना में 2025 तक भक्तों की संख्या करीब 15 गुना से ज्यादा बढ़ चुकी है, जिसने न सिर्फ प्रदेश बल्कि पूरे देश के धार्मिक पर्यटन का नक्शा बदल दिया है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2015 में अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगभग 1.54 करोड़ थी, जबकि 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 23 करोड़ से अधिक हो गया है। यह वृद्धि अपने आप में ऐतिहासिक मानी जा रही है। रामनगरी ने पिछले 11 वर्षों में आस्था, संस्कृति और पर्यटन के क्षेत्र में ऐसा पुनर्जागरण देखा है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर तक लोगों का ध्यान आकर्षित किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अयोध्या के धार्मिक पर्यटन में निर्णायक मोड़ वर्ष 2019 में आया, जब सुप्रीम कोर्ट का राम मंदिर के पक्ष में फैसला सामने आया। इसके बाद 2020 में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण की शुरुआत हुई। कोरोना काल को छोड़ दें तो इसके बाद हर साल श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई। 2024 में रामलला की भव्य प्राण प्रतिष्ठा के बाद तो अयोध्या में आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा, जिसने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए।
इतिहासकार डॉ. हरिप्रसाद दुबे बताते हैं कि दीपोत्सव जैसे आयोजनों ने अयोध्या को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। दीपोत्सव, रामनवमी, सावन मेला, राम विवाहोत्सव जैसे धार्मिक आयोजनों में हर साल नए कीर्तिमान बने। मंदिर निर्माण के साथ-साथ सड़क, रेलवे, एयरपोर्ट, घाटों के सौंदर्यीकरण और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था ने श्रद्धालुओं के लिए अयोध्या को और सुगम बना दिया।
साकेत महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. सुधीर राय के अनुसार श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या का सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। होटल, धर्मशालाएं, परिवहन सेवाएं, स्थानीय हस्तशिल्प, गाइड सर्विस और छोटे व्यापारियों को बड़ा लाभ मिला है। अयोध्या अब केवल एक तीर्थ स्थल नहीं रही, बल्कि एक पूर्ण धार्मिक-पर्यटन हब के रूप में विकसित हो चुकी है, जहां आस्था और रोजगार दोनों साथ-साथ बढ़ रहे हैं।
सरकारी स्तर पर भी अयोध्या को विश्वस्तरीय धार्मिक नगर के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया है। स्मार्ट सिटी परियोजनाएं, डिजिटल सुविधाएं, बेहतर ट्रैफिक मैनेजमेंट और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर ने अयोध्या को परंपरा और आधुनिकता का संगम बना दिया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पार्किंग, यातायात और सुरक्षा को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
अगर बीते वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2015 में 1.54 करोड़, 2019 में 2.04 करोड़, 2023 में करीब 5.75 करोड़ और 2024 में 16.44 करोड़ श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे। वहीं 2025 में यह संख्या 23.82 करोड़ के पार पहुंच चुकी है। यह साफ संकेत है कि आने वाले वर्षों में अयोध्या धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में और नए रिकॉर्ड बना सकती है।
कुल मिलाकर, प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या सिर्फ श्रद्धा का केंद्र नहीं रही, बल्कि उत्तर प्रदेश की आर्थिक और सांस्कृतिक ताकत के रूप में भी उभरकर सामने आई है। यही वजह है कि आज देश-दुनिया की नजरें रामनगरी अयोध्या पर टिकी हुई हैं।




