भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की राष्ट्रीय टीम में यूपी के 8 नेताओं को जिम्मेदारी मिली है। इनमें रेखा वर्मा और प्रो. तारिक मंसूर को दोबारा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। जातीय-क्षेत्रीय समीकरणों को साधते हुए 6 नए चेहरों की एंट्री कराई गई है। पार्टी ने लक्ष्मीकांत वाजपेयी और राधा मोहन दास अग्रवाल जैसे 5 कद्दावर नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में जगह नहीं दी है। एक्सपर्ट की मानें तो यह बदलाव केवल संगठनात्मक फेरबदल नहीं, इसके पीछे 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव की रणनीति छिपी है। इस बदलाव को हम तीन पॉइंट्स में समझेंगे- नितिन नवीन जुलाई में यूपी के दौरे पर आए थे। उस दौरान उन्होंने सरकार, संगठन और NDA सहयोगियों के बीच तालमेल पर जोर दिया था। यानी अब राष्ट्रीय टीम में भी वही चेहरा चाहिए, जो 2027 के चुनावी मिशन में सीधे उपयोगी हो। पहले जानिए रेखा वर्मा और तारिक मंसूर को दोबारा मौका क्यों मिला कुर्मी-महिला वोटों का परफेक्ट बैलेंस : यूपी में यादवों के बाद पिछड़ों (OBC) में सबसे बड़ी आबादी कुर्मी समाज की है। 2024 के आम चुनाव में कुर्मी वोटबैंक का एक बड़ा हिस्सा सपा-कांग्रेस की तरफ शिफ्ट हुआ था। रेखा वर्मा को बरकरार रखकर पार्टी ने OBC/कुर्मी समाज को यह संदेश दिया है कि उनके नेताओं का कद राष्ट्रीय स्तर पर बरकरार है। इसके साथ ही वे महिला कोटे को भी मजबूत करती हैं। संगठनात्मक अनुभव : रेखा वर्मा के पास उत्तराखंड सह-प्रभारी के रूप में राज्यों में संगठन संभालने का अनुभव है। नवीन की नई टीम को चुनावी राज्यों में काम करने के लिए ऐसे परखे हुए सांगठनिक चेहरों की जरूरत थी। पसमांदा मुस्लिम कार्ड, बुद्धिजीवी छवि : अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति और एमएलसी डॉ. तारिक मंसूर भाजपा का बड़ा और पढ़ा-लिखा मुस्लिम चेहरा हैं। पार्टी लगातार सूबे के ‘पसमांदा’ (पिछड़े) मुसलमानों के बीच अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है। सपा के मुस्लिम वोटबैंक में सेंधमारी : 2027 चुनाव में 107 मुस्लिम बहुल सीटों पर एकतरफा ध्रुवीकरण रोकने, मुस्लिम समाज के प्रबुद्ध/मध्यम वर्ग तक ‘सबका साथ, सबका विकास’ का मैसेज पहुंचाने के लिए बीजेपी ने दोबारा उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया है। 6 नए चेहरों की एंट्री के पीछे का सियासी समीकरण समझिए लोकसभा चुनाव 2024 में अमेठी से हारने के बाद स्मृति ईरानी की सक्रियता कम हो गई थी। अब राष्ट्रीय महामंत्री बनाकर भाजपा ने उन्हें फिर संगठन के फ्रंट-फुट पर ला दिया है। स्मृति ईरानी राहुल गांधी को अमेठी से हराने और बीजेपी सरकार में मंत्री रहने के कारण पार्टी में मजबूत पहचान रखती हैं। उन्हें यूपी कोटे से राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी देकर पार्टी ने यह संकेत दिया है कि स्मृति ईरानी 2027 में यूपी के लिए अहम चेहरा होंगी। वह महिला वोटर्स और कांग्रेस के खिलाफ भाजपा के नैरेटिव में फिट बैठ सकती हैं। हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाना पूर्वांचल के लिहाज से महत्वपूर्ण है। वह लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहे हैं। यूपी की राजनीति में संगठनात्मक काम का अनुभव रखते हैं। भाजपा के लिए पूर्वांचल इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि 2022 में उसे पूर्वी यूपी में ही झटका लगा था। लोकसभा में भी उसे नुकसान हुआ था। हाल के दिनों में ब्राह्मणों को लेकर दावा किया जा रहा था कि वे पार्टी से नाराज हैं। यूजीसी और शंकराचार्य प्रकरण के बाद अब भाजपा हरीश द्विवेदी का कद बढ़ाकर पूर्वांचल के नाराज ब्राह्मण नेताओं को साधेगी। यूपी में ब्राह्मण समाज की आबादी करीब 12-14% मानी जाती है। कई विधानसभा सीटों पर इसका चुनावी प्रभाव है। डॉ. भोला सिंह बुलंदशहर से लगातार तीन बार सांसद हैं। वे खटीक समाज से आते हैं। पश्चिमी यूपी में भाजपा के प्रमुख दलित चेहरों में गिने जाते हैं। लगातार चुनावी जीत, संगठन में सक्रियता को उनकी नई जिम्मेदारी की बड़ी वजह माना जा रहा है। खटीक समाज यूपी के दलित वोटरों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे भाजपा का पारंपरिक समर्थन आधार माना जाता रहा है। भोला सिंह को राष्ट्रीय टीम में जगह देकर भाजपा अपने पारंपरिक दलित वोटबैंक को मजबूत बनाए रखना चाहती है। संगीता यादव पूर्वांचल के गोरखपुर क्षेत्र से आती हैं। वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं। वे भाजपा के महिला और OBC चेहरों में शामिल हैं। संगठन में उनकी सक्रियता और पूर्वांचल से जुड़ाव को उनकी नई जिम्मेदारी की अहम वजह माना जा रहा है। संगीता यादव को राष्ट्रीय टीम में जगह देकर भाजपा की कोशिश पूर्वांचल में महिलाओं और OBC वोटर्स के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की है। यादव समाज से आने वाली संगीता के जरिए सपा के पारंपरिक यादव वोटबैंक के बीच भी भाजपा अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने का संदेश देना चाहती है। अमरपाल मौर्य को OBC मोर्चे की जिम्मेदारी देना 2027 की चुनावी रणनीति का सबसे स्पष्ट हिस्सा है। भाजपा की यूपी में सफलता का बड़ा आधार गैर-यादव OBC वोट रहा है। मौर्य, कुर्मी, सैनी, लोधी, निषाद, राजभर, पाल, प्रजापति समेत तमाम OBC जातियां भाजपा के सामाजिक गठजोड़ में महत्वपूर्ण हैं। अमरपाल मौर्य के जरिए पार्टी इस पूरे सामाजिक समूह को साधने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक चेहरा आगे कर रही है। यानी यह पद संगठनात्मक कम और चुनावी ज्यादा दिखाई देता है। कुंवर बासित अली ने यूपी भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर करीब 5 साल तक संगठन को सक्रिय रखा। इसी संगठनात्मक अनुभव को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें अल्पसंख्यक मोर्चे का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर भाजपा की कोशिश पश्चिमी यूपी के मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने की है। खासतौर पर पसमांदा और मुस्लिम युवाओं के बीच संगठन को मजबूत करने पर जोर हो सकता है। अगर पार्टी इन चेहरों की वजह से मुस्लिम बहुल सीटों पर 3-4% की भी सेंध लगा पाई, तो कई विधानसभा सीटों पर समीकरण बदल सकती है। नागेंद्र कुमार के करीबियों को मिली जगह नितिन नवीन की नई टीम में यूपी से जो चेहरे शामिल हुए हैं, उनमें ज्यादातर भाजपा के राष्ट्रीय संगठक नागेंद्र कुमार के करीबी हैं। नागेंद्र यूपी में भाजपा के प्रदेश महामंत्री संगठन रहे हैं। उन्हें यूपी की राजनीति का लंबा अनुभव है। नितिन नवीन की टीम तैयार करते समय यूपी से किन चेहरों को शामिल किया जाए, इसमें नागेंद्र कुमार से रायशुमारी के बाद ही फैसला हुआ। इस भास्कर पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दीजिए- अब पढ़िए पुराने 5 चेहरों को क्यों हटाया? 1. लक्ष्मीकांत वाजपेयी : भाजपा के वरिष्ठ ब्राह्मण नेता और संगठन के अनुभवी चेहरा हैं। जुलाई में नितिन नवीन ने यूपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्षों से मुलाकात की थी, जिसमें वाजपेयी भी शामिल थे। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी उन्हें पूरी तरह किनारे नहीं कर रही है। माना जा रहा है कि यूपी चुनाव में भाजपा उनके अनुभव का इस्तेमाल कर सकती है। 2. अरुण सिंह : वह लंबे समय तक भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और मुख्यालय प्रभारी रहे हैं। जून 2026 तक भी वे पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय थे। नई टीम में जगह नहीं मिलने को उम्र या प्रभाव कम होने के बजाय जिम्मेदारियों में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। 3. राधामोहन दास अग्रवाल : गोरखपुर से चार बार विधायक रह चुके हैं और इस समय राज्यसभा सांसद हैं। सीएम योगी के साथ उनके रिश्तों को लेकर भी अक्सर चर्चा होती रही है। ऐसे में पार्टी के लिए उन्हें पूरी तरह सक्रिय राजनीति से दूर रखना ठीक नहीं होगा। माना जा रहा है कि भाजपा यूपी चुनाव में उनके अनुभव और राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर सकती है। 4. राजेश अग्रवाल : पिछली टीम में उन्हें कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन नई टीम में उनका नाम नहीं है। इसे संगठन में बदलाव और जिम्मेदारियों में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी लंबे समय तक एक ही व्यक्ति को एक पद पर रखने के बजाय नए चेहरों को मौका देती रही है। 5. सुरेंद्र सिंह नागर : पिछली टीम में वे राष्ट्रीय सचिव रहे और संगठन की जिम्मेदारियां संभालते रहे। 2024 में उन्हें बिहार का सहप्रभारी भी बनाया गया था। नई टीम में जगह नहीं मिलने का मतलब यह नहीं है कि पार्टी में उनकी भूमिका खत्म हो गई है। माना जा रहा है कि भाजपा चुनाव के दौरान उन्हें किसी राज्य या क्षेत्र की जिम्मेदारी दे सकती है। ————— ये भी पढ़ें- BJP की नई टीम में UP के 8 चेहरे, 2-मुस्लिम:बासित अली ने चौंकाया, हरीश द्विवेदी का प्रमोशन, स्मृति ईरानी की वापसी से अमेठी में जश्न भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार दोपहर 3 बजे पार्टी की राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया। इसमें यूपी का दबदबा दिखा। प्रदेश के 8 नेताओं को नितिन नवीन ने अपनी टीम में जगह दी है। OBC और अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष यूपी से हैं। पढ़िए पूरी खबर…




