उत्तर प्रदेश में सामने आए कोडीन कफ सिरप तस्करी मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने दो आरोपियों को बड़ी राहत दी है। सहारनपुर निवासी विभोर राणा और विशाल सिंह को कोर्ट ने सशर्त अंतरिम जमानत प्रदान की है। हाईकोर्ट ने साफ किया कि दोनों आरोपी जांच में पूरा सहयोग करेंगे और जब भी जांच एजेंसी उन्हें बुलाएगी, वे उपस्थित रहेंगे।
यह आदेश न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की एकल पीठ ने दोनों आरोपियों की जमानत अर्जियों पर सुनवाई करते हुए दिया। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 5 जनवरी 2026 के लिए तय की है।
क्या है पूरा मामला
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 8 अप्रैल 2024 को लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाने में औषधि विभाग के इंस्पेक्टर संदेश मौर्य ने एक एफआईआर दर्ज कराई थी। एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि फेंसिडल कफ सिरप और अन्य दवाओं का अवैध भंडारण किया जा रहा था और इन्हें नशे के रूप में इस्तेमाल के लिए बिहार, झारखंड, असम, पश्चिम बंगाल और यहां तक कि बांग्लादेश तक तस्करी की जा रही थी।
इससे पहले 12 फरवरी 2024 को यूपी एसटीएफ ने सूचना के आधार पर छापा मारते हुए एक ट्रक से भारी मात्रा में कोडीन युक्त कफ सिरप बरामद किया था। इसी कार्रवाई के बाद इस पूरे नेटवर्क की जांच शुरू हुई और एक बड़े तस्करी गिरोह के सामने आने की बात कही गई।
दोनों आरोपी कैसे आए जांच के घेरे में
जांच आगे बढ़ने पर सहारनपुर निवासी विभोर राणा और विशाल सिंह का नाम सामने आया। पुलिस के मुताबिक, दोनों को इस मामले में 11 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद 6 दिसंबर 2025 को लखनऊ की निचली अदालत ने दोनों की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।
निचली अदालत से राहत न मिलने के बाद दोनों आरोपियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में जमानत के लिए याचिका दाखिल की थी।
अभियोजन के गंभीर आरोप
अभियोजन का दावा है कि सह-आरोपियों ने अलग-अलग नामों से फर्जी फर्में बनाई थीं। इन फर्मों के बैंक खातों से होने वाले लेन-देन कथित तौर पर विभोर राणा और विशाल सिंह ने अपने सहयोगियों और कर्मचारियों की बैंक आईडी और पासवर्ड के जरिए किए।
जांच में यह भी सामने आया कि मारुति मेडिकोज से जुड़े लेन-देन के अलावा ओम मेडिकोज, अभि फार्मा, आशु मेडिकोज और जीआर ट्रेडिंग के साथ भी संदिग्ध transactions हुए थे। आरोप है कि इन्हीं फर्जी फर्मों के जरिए फेंसिडल कफ सिरप की अवैध खरीद-फरोख्त को कागजों में वैध दिखाया गया और तस्करी को अंजाम दिया गया।
कोर्ट की शर्तें
हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत देते हुए स्पष्ट किया कि दोनों आरोपी
- जांच में पूरा सहयोग करेंगे
- जांच एजेंसी द्वारा बुलाए जाने पर उपस्थित रहेंगे
- किसी भी तरह से जांच को प्रभावित नहीं करेंगे
कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले की merits पर अंतिम फैसला अगली सुनवाई के बाद लिया जाएगा।
कुल मिलाकर, कोडीन सिरप मामले में हाईकोर्ट का यह आदेश आरोपियों के लिए temporary राहत जरूर है, लेकिन जांच और आगे की सुनवाई पर सबकी नजर टिकी हुई है।




